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Monday, 16 May 2016

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सही लक्ष्य साधिए: Target

Target
आज मैं आपलोगों के सामने ऐसी बात रखने जा रहा हूँ जो कि जीवन में इस बात को लेकर बहुत सारी दुविधाएँ होती है कि – अपना लक्ष्य कैसे चुने. कभी भी बड़ा आदमी बनने के लिए बड़ा सोच रखना जरुरी है और साथ ही साथ उस लक्ष्य को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत कि आवश्यकता होती है. अगर आपकी सोच बड़ी है पर आपकी मेहनत आपके सोच के मुवाफ़िक़ काम है तो आप को सफलता नहीं मिल सकती.

सही लक्ष्य साधिए:

एक Doctor वर्षों Struggle करने के बाद कार-बंगला भी रखता है, सुसज्जित माकन में रहता है, अच्छे वस्त्र पहनता है. बड़े-बड़े आदमी उसके यहाँ आते हैं, उसका वैभव (Glory) हर बात से प्रकट होता है. उसकी तड़क-भडक देखते ही College से निकले हुए एक नए युवक को प्रलोभन होता है कि यदि व्यवसाय है तो डॉक्टर का ही है. दुसरे दिन मोटर कार में घूमते हुए वह Engineer को देखता है, तब उसको विचार होता है कि यदि पेशा अच्छा है तो Engineering का है. उसको सफल प्रयत्न करने वाले नित नए मनुष्य दिखाई देते हैं और उसको नित नई कमाना सताती है. वह असमंजस में पड़ जाता है कि यह पेशा अच्छा है या वह पेशा. उसको इस लुभावनी तड़क-भड़क पर मोहित होने से पहले यह विचार कर लेना चाहिए कि डॉक्टर साहब या इंजिनियर साहब ने उस तड़क-भड़क, मान-मर्यादा को वर्षों कठिनाइयाँ झेलकर प्राप्त किया है. अपने पेशे में सफल होने के लिए उनको न जाने कितने कष्ट उठाने पड़े होंगे; वे एक ही दिन में समृद्धि (Prosperity) को प्राप्त नहीं हो गए थे.

लक्ष्य किस प्रकार बनाया जाए, यह एक विचारणीय बात है. प्रश्न यह है कि कौन सा पेशा स्वीकृत किया जाए? अपने बड़े-बूढों की सम्मति से या अपने अंतः करण की प्रेरणा से या मित्रों के कहने से या अपनी प्राकृतिक जन्मस्थिति से अपना Target या Goal बनाना चाहिए? इस प्रश्न का यथार्थ उत्तर देना अत्यंत कठिन है. मेरा मानना है कि सर्वप्रथम अपनी प्राकृतिक जन्मस्थिति को देखते हुए ही अपना लक्ष्य बनाना चाहिए; क्योंकि व्यवसाय की तुच्छता कोई वस्तु नहीं है. एक झाड़ू देने वाला जमादार भी खुश व सुखी हो सकता है, जबकि एक राजकुमार (Prince) वैभव और ऐश्वर्य से घिरा हुआ होता है, वह राजमहल (Palace) में हो रहे अवसरों से पूरा लाभ उठाने के बा-वजूद भी उसे दुःख का अनुभव हो सकता है.

जन्मस्थिति के अतिरिक्त लक्ष्य बनाने में अनुभव भी हमारा सहायक हो जाता है. अंतः करण की पुकार हमें सही मार्ग सही पर ला देती है, परन्तु संलग्नता और एकाग्रता के बिना हमें किसी भी मार्ग पर, किसी भी व्यवसाय में सफलता प्राप्त नहीं हो सकती है.

जीवन में सफलता की कामना करने वाले व्यक्ति को चाहिए कि वे संलग्नता और एकाग्रता की विचित्र शक्तियों को अपने आप में विकसित करें, ठीक उसी तरह जैसे- किसान अपनी फसल की और सांप अपने मणि कि हिफाजत करता है.

Note:

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Monday, 25 April 2016

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How to Get Success Life in Hindi: जीवन में सफल होने के अदभूद राज़

How to Get Success Life in Hindi
मैं आप लोगों को एक अच्छी जानकारी देने जा रहा हूँ.ये आपके जीवन से जुड़ी कड़ी के समान है, शायद यह Motivational Story पढ़ा कर कुछ ऐसा करने का मन करे जिससे आपके बच्चों को उनके जीवन में कभी दुःख न हो, और न आपके बच्चों को जीवन में किसी कठिनाई का सामना करना पड़े.

आज की इस बेरोजगारी की दुनिया में लोग बहुत ही परेशान हैं. लोगों को सबसे ज्यादा किसी चीज की चिंता होती है तो वो है -  जॉब...!!! 

जॉब का न मिलना एक बहुत ही बड़ी Problem है, जो की जीवन के समस्याओं में से सबसे बड़ी समस्या है. आज लोग Engineering, Medical, M.B.B.S., PhD, Graduation, इत्यादि की पढाई तो कर लेते हैं, लेकिन उन्हें Job पाने के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. अगर कोई इतनी Higher Degree हासिल करने के बाद अगर Business करना चाहे तो घर वाले Support नहीं करते है. 

घरवालों का उस वक्त ये बात हमेशा जुबान पे होती है कि अगर Business ही करना था तो पढाई में इतना पैसा खर्च क्यों किए. उन्ही पैसों से Business कर लेते तो आज तक तुम्हारे Business की एक अपनी Market Value होती. लेकिन  घरवालों का यह व्यहवार काफी दुःख भरी है. इससे किसी भी व्यक्ति का मनो बल टूट सकता है. 
मैं उन सभी लोगों से आग्रह करता हूँ जो घर के मुख्या हैं- वे अपने बच्चों को जो Higher Degree हासिल करने के बाद अगर Business करना चाहते हैं उन्हें उसके Business में हाथ बटाना चाहिए और उसे ये शिक्षा देनी चाहिए कि Business करो मगर साथ ही साथ Government Job पाने के लिए अलग से Time निकाल के उस के लिए मेहनत भी करो. शायद साल दो साल, पांच साल के बाद किस्मत चमक जाए तो आपके लड़के की Job भी होगी और आपके लिए एक घर बैठे Market में जमा हुआ Business भी होगा. अगर Job नहीं भी लगे तो कम से कम आपके बेटे की अपनी Business तो होगी, आपको कभी अपने बेटे को लेकर कोई चिंता नहीं होगी. उसकी Life में काफी मुश्किलें आएंगी लेकिन उन मुश्किलों को सहन करने की क्षमता उसमे आ जाएगी. वो अब एक Successful व्यक्ति बन जाएगा. 

एक बहुत बड़ी समस्या सभी के परिवार में होती है कि Guardian अपने बच्चों की Life से Related फैसला खुद ही करते हैं. जिससे उनके बच्चों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है. वो अपनी Life को घुट घुट के जीते हैं, और पूरी जिंदगी अपने माँ-बाप को कोसते रहते हैं. इसलिए मैं उन सभी माँ-बाप से गुजारिश करता हूँ कि अपने बच्चों के Life से Related फैसले खुद न करें. आप अपने बच्चों से उनके जिंदगी के बारे में अच्छी बातें करें और अच्छी सलाह दें. बस...!!! फैसला आपके बच्चे खुद ले लेंगे.

एक फिल्म जो Bollywood की दुनिया में बहुत Motivational Movies में सबसे अच्छी Movie मानी जाती है- 3 Idiot. इस फिल्म में बहुत ही अच्छी शिक्षा मिली कि अपने बच्चों को खुल के जीने दें और उन्हें अपने Future Related निर्णय खुद लेने दें. आप अपने बच्चों को इसके लिए अच्छी सलाह दे सकते हैं लेकिन फैसला उन्हें खुद लेने की आजादी दें. तो Success की मुकाम को खुद हासिल कर लेंगें. Success होने के बाद वे आपको तहेदिल से प्यार और सम्मान देंगे. यहाँ तक की वो आपका बेटा होने पर गर्व करेगा. आप जब बूढ़े हो जाएँगे तो आपका अच्छे से ख्याल रखेगा और आपकी सेवा पुरे मन से करेगा.

आप अगर किसी Family के Guardian हैं तो आप ये सोचते हैं कि मेरे माँ-बाप ने मेरी जिंदगी से Related फैसला किया, तो मैं भी अपने बच्चों के Life Related फैसला करूँगा. लेकिन ये बिल्कुल गलत है.

आप चाहते हैं कि मेरा बेटा किसी अच्छी Company में Job करे लेकिन आपका बेटे को जॉब बिल्कुल पसंद नहीं. वो आपकी इज्ज़त रखने के लिए अगर Job कर भी ले तो वो कभी मन से अपना काम नहीं करेगा. ऐसे में वह कभी Success नहीं हो सकता.

Note: 

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Friday, 18 March 2016

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Professor (Dr.) Pushpendra Kumar Arya: प्रोफ़ेसर (डॉ.) पुष्पेन्द्र कुमार आर्य

प्रोफ़ेसर (डॉ.) पुष्पेन्द्र कुमार आर्य

Few Lines about Professor (Dr.) Pushpendra Kumar Arya: प्रोफ़ेसर (डॉ.) पुष्पेन्द्र कुमार आर्य के बारे में कुछ बातें 

In Hindi:

प्रोफ़ेसर (डॉ.) पुष्पेन्द्र कुमार आर्य देश के वरिष्ठ लेखक, पत्रकार, मार्गदर्शक, विचारक एवम् शिक्षाविद् के रूप में विख्यात है. पत्र-पत्रिकाओं और रिसर्च जर्नल्स (Research Journals) में पुष्पेन्द्र कुमार आर्य के तीन हज़ार से भी अधिक रचनाएँ तथा विविध महत्वपूर्ण विषयों पर चालीस से भी अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं. भारत के विभिन्न राष्ट्रीय समाचार पत्र-पत्रिकाओं के सम्पादकीय विभाग में पुष्पेन्द्र कुमार आर्य शीर्षस्थ पदों पर कार्य कर चुके हैं. पुष्पेन्द्र कुमार आर्य “प्रेस कौंसिल ऑफ़ इंडिया” (Press Council of India) में दो बार “पर्यवेक्षक” (Supervisor) रहे. तीन वर्ष तक भारत के शीर्षस्थ उद्योगपति मुकेश अम्बानी (Mukesh Ambani) के “मिडिया सलाहकार” (Media Advisor) रहे. पुष्पेन्द्र कुमार आर्य “संचार मंत्रालय” (Ministry of Communication) में भी सलाहकार रह चुके हैं. “सांस्कृतिक राजदूत” Cultural Ambassador की हैसियत से पुष्पेन्द्र कुमार आर्य ने लगभग बीस से भी ज्यादा देशों की यात्रा की. Guest Professor के रूप में पुष्पेन्द्र कुमार आर्य दुनिया के विश्वविद्यालय में अध्यापन के हेतु प्रायः जाते रहते है. 
 

प्रोफ़ेसर (डॉ.) पुष्पेन्द्र कुमार आर्य को मिले सम्मान और पुरस्स्कारों की सूची: List of Awards 

 

1. वर्ष 1999 में सृजनात्मक लेखन के लिए सर्वोच्च सम्मान “इंटरनेशनल वोकेशनल अवार्ड”.

    (International Vocational Award)

 

2. वर्ष 2002 में ओरिएंटल कल्चर अकादमी, बैंकाक (थाईलैंड) के द्वारा “इंस्टिट्यूट अवार्ड”.

    (Institute Award)

 

3. वर्ष 2003 में अमेरिका बायोग्राफिकल इंस्टिट्यूट इंक, कैरोलिना (अमेरिका) के द्वारा “मैन ऑफ़ द ईयर”. 

    (Man of the Year)

 

4. वर्ष 2004 में विश्व आंदोलन ट्रस्ट, मुंबई द्वारा “राष्ट्र गौरव सम्मान”. 

 

5. वर्ष 2005 में हिंदी संगठन, मॉरिशस का “हिंदी सम्मान”. 

 

6. वर्ष 2010 में हिंदी अकादमी, दिल्ली सरकार के द्वारा “साहित्य कृति पुरस्कार”. 

 
सल्तनत ऑफ़ ओमान के “निशान-ए-मस्कट” समेत लगभग 45 सम्मानों से पुष्पेन्द्र कुमार आर्य को सम्मानित किया जा चुका है. पुष्पेन्द्र कुमार आर्य को अत्यंत प्रतिष्ठित प्रत्यायिक पत्रकार (Accredited Journalist) की श्रेणी और “गृह मंत्रालय तथा सुचना एवं प्रसार मंत्रालय, भारत सरकार” (Ministry of Home Affairs  and The Ministry of Information and Advertising, the Government of India)के द्वारा प्रदत्त सम्मान प्रमुख हैं. 
 

Change Your Destiny By Pro. P.K. Arya : बदलिए अपनी किस्मत – प्रो. पी. के. आर्य 

 

इस जीवन में हरेक इन्सान का अपना सपना होता है कि वह भी सफल (Success) हो. जिंदगी में जो सुख-सुविधाएँ लोग भोग रहें हैं, वह भी उनका उपभोग करें. प्रत्येक व्यक्ति उन्नति के शिखर पर पहुँचने का भरसक कोशिस भी करता है. लेकिन जीवन और जगत की जटिलताओं के कारण, उपभोगता संस्कृति के फैलाव, Fast-Life, सामाजिक और राजनितिक भ्रष्टाचार, प्रतिस्पर्धा, आपाधापी, चरम आधुनिकता एवं व्यावसायिक होड़ के कारण व्यक्ति सफलता और उन्नति की खोज में दौड़ते-दौड़ते थक जाता है. 
 
मंजिल तक नहीं पहुँच पाने की स्थिति में हताश और निराश होकर वह अपने मन में अनजाना डर और चिंता बैठा लेता है. कभी-कभी तो इन्सान खुद को इतना टुटा हुआ महसूस करता है कि उसके मन में यह सोंच घर कर जाती है कि वह कभी सफल हो ही नहीं सकता...!!! 
 
कामयाबी के रास्ते उसे अपने से दूर, बहुत दूर लगने लगते हैं. वह हर समय अपने आपको मनहूस व बदकिस्मत समझने लगता है. उसे लगता है कि उसका जीवन इस धरती पर बोझ है. उसे हर तरफ अँधेरा ही अन्दर दिखाई देता है. लेकिन मनुष्य को ऐसे अंधियारों में, निराशा और दुर्भाग्य के बियाबान जंगल में नहीं छोड़ा जा सकता. वह संसार का जीवित प्राणी है. उसके भीतर सवोत्तम बनने की संभावनाएँ छुपी पड़ी है. हरेक व्यक्ति को उन्नति करने और सफल होने का अधिकार है. इसके लिए उनके अंतर आत्मा को जगाना होगा. उसमें जितनी भी कमजोरियां व बुराइयाँ हैं उन्हें दूर करके उसे उत्साही और जागरूक इन्सान बनाना होगा. उसमें छाई हुई कुंठा को परास्त करके उसकी सुप्त शक्तियों को जागृत करना होगा. यही समूचे सभ्य तथा शिष्ट समाज का कर्तव्य है. 

सफलता की ख़ुशी मानना अच्छा है, पर उससे ज़रूरी है- अपनी असफलता से सीख लेना.


Note:

 
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Wednesday, 16 March 2016

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फर्श से अर्श तक… A Success Story of Google CEO Sundar Pichai in Hindi

Google CEO Sundar Pichai
मैंने इस Story का Title फर्श से अर्श तक इसलिए रखा है क्योंकि ये Story उनके बारे में है, जिन्होंने कड़ी मेहनत, लगन, परिश्रम और संघर्ष के साथ अपने जीवन की शुरुआत की और सफलता की सीढ़ी पर पहला कदम रखा. वे लगातार कड़ी मेहनत करते रहे और Success के मुकाम तक पहुँच गए.
 
आज मैं आप लोगों के से ऐसी जानकारी Shear कर रहा हूँ जिन्हें बहुत से लोग शायद जानते हो लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें ये मालूम नहीं होगा कि दुनिया के मशहूर Search Engine GOOGLE के C.E.O. हमारे भारत देश में जन्मे और भारत के मूल निवासी जिनका नाम सुन्दर पिचाई है. तो चलिए जानते हैं Sundar Pichai के बारे में जिन्होंने सफलता के इस मुकाम को हासिल किया.
 

A Success Story of Google CEO Sundar Pichai in Hindi:

यह कहानी है फर्श पर सोने वाले युवा सुंदर की जो आज गूगल का C.E.O. बनकर अर्श पर हैं. सुंदर की कामयाबी की कहानी किसी परिकथा से कम नहीं. वर्ष 1972 में Chennai में जन्मे सुंदर के पिता British Company G.E.C. में Engineer थे. उनका परिवार दो कमरों के एक मकान में रहता था. उसमें सुंदर की Study के लिए कोई अलग Room नहीं था. इसलिए वे Drawing Room के फर्श पर अपने छोटे भाई के साथ सोते थे. घर में न तो Television था और न ही Car. इससे उनके परिवार की आर्थिक हैसियत का अनुमान लगाया जा सकता है. लेकिन इंजीनियर पिता ने बचपन में अपने बेटे के मन में तकनीक के बीज बो दिए. इसलिए तमाम अभाव भी सुंदर के आगे बढ़ने की राह में बाधा नहीं बन सके.
 
पिचई का प्रारंभ से ही पढाई में Talented थे. उन्हें Cricket में काफी रूचि थी और अपनी स्कूल के Cricket Team के Captain भी थे. एक Cricket Player के रूप में उन्होंने कई मैडल जीते, जिसे देखकर ही इनके मां-बाप को अंदाजा हो गया था कि आगे चलकर उनका बेटा परिवार का नाम रौशन करेगा.
 

Biography of Sundar Pichai: सुन्दर पिचाई की जीवनी


पूरा नाम पिचाई सुन्दरराजन / Pichai Sundararajan
जन्म 12th July 1972 Chennai, Tamil Nadu, India
पिता रघुनाथ पिचई
पत्नी अंजलि पिचाई / Anjali Pichai
Employer Google Inc.
Occupation CEO of Google

पिचाई सुंदरराजन, जिन्हें दुनियाँ सुन्दर पिचाई (Sundar Pichai) के नाम से जानती है, एक Senior Technology Executive हैं. भारत में जन्मे और Indian Institute of Technology, Kharagpur (IIT Kharagpur) से B. Tech. करने वाले Sundar Pichai ने 2004 में World की सबसे बड़ी Search engine company Google Join किया और अपनी कड़ी मेहनत और योग्यता के बल पर company के सबसे बड़े पद के लिए चुने गए और वर्तमान में Search engine company Google के C.E.O. (Chief Executive Officer) हैं. (10th August 2015 को GOOGLE के Chief Executive Officer के रूप में चुना गया.)
 
Sundar Pichai का जन्म 12 जुलाई 1972 में Tamil Nadu की राजधानी Chennai में एक तमिल परिवार में हुआ था. उनके पिता का नाम रघुनाथ पिचाई और माता का नाम लक्ष्मी है. Sundar का बचपन मद्रास के अशोक नगर में बीता. सुन्दर के पिता रघुनाथ पिचाई British Company “जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी” (G.E.C.) में Senior Electrical Engineer थे और Company के Electrical parts बनाने वाली एक इकाई का प्रबंधन देखते थे.
 

Education:

1. Sundar Pichai ने अशोक नगर स्थित जवाहर विद्यालय से कक्षा 10th तक की पढ़ाई की.

2. IIT Chennai में स्थित वना वाणी स्कूल से 12th की पढ़ाई की.
 
3. Sundar ने B. Tech. की पढ़ाई के लिए IIT Kharagpur में दाखिला लिया और Metallurgy Engineering में डिग्री हासिल की.
 
4. IIT Kharagpur में उनके प्राध्यापकों ने उन्हें Stanford University से Ph. D करने की सलाह दी पर सुन्दर ने M.S. और M.B.A. किया.
 
5. उन्होंने Stanford University से “Material Science and Engineering” में Master of Science किया और University of Pennsylvania के “Wharton School” से Management (M.B.A.) की शिक्षा ग्रहण की.
 

Google Careers:

Sundar Pichai ने 2004 में GOOGLE Join किया जहाँ उन्हें “Product Management” और ‘नई खोजों और नए विचारों’ से सम्बंधित कार्यों की Responsibility सौंपी गयी. इसके तहत उन्होंने Google Chrome, Chrome OS और Google Drive जैसे उत्पादों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसके साथ-साथ उन्होंने Google Maps और Gmail जैसे महत्वपूर्ण उत्पादों के Applications Development में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 19 नवम्बर 2009 में Sundar Pichai “Chrome OS” का प्रदर्शन किया और उसके बाद Chromebook को 2011 में जांच व् परिक्षण के लिए उतारा गया. जांच और परिक्षण के बाद सन 2012 में इसे ग्राहकों के लिए उतारा गया. मई 2010 में Sundar Pichai ने Google के नए Video Codec VP8 के Open Sourcing का एलान किया. Google के इस Video Codec ने एक नया Video format “WebM” प्रस्तुत किया.
 
मार्च 2013 में Android भी Sundar Pichai के अंतर्गत आने वाले उत्पादों में शामिल हो गया. इससे पहले Android का कार्य और विकास Andy Rubin के प्रबंधन में हो रहा था.
 
Sundar Pichai को गूगल का अगला C.E.O. (Chief Executive Officer) बनाने के निर्णय की जानकारी 10th August 2015 को दी गई. 24 October 2014 को Google के Co-founder “Larry Page” ने Sundar को उत्पाद प्रमुख बनाने की घोषणा की थी.
 

Note:

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Tuesday, 15 March 2016

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Dr. A. P. J. Abdul Kalam in Hindi

Dr. A. P. J. Abdul Kalam in Hindi

About Dr. A. P. J. Abdul Kalam in Hindi:

जब दुनिया के महान शखसियतों का नाम लिया जाता है तो हम हिन्दुस्तानियों के जुबान पर सबसे पहले जो नाम आता है जिसे दुनिया “Dr. A. P. J. Abdul Kalam” के नाम से जानती है. जिन्होंने आपना नाम महान शखसियतों में अपने महान कार्यों, लगन और मेहनत से जोड़ा है. तो चलिए आज हमलोग भारत के 11th राष्ट्रपति Dr. A. P. J. Abdul Kalam के बारे में कुछ जानते हैं. मैंने Internet और किताबों की मदद से कुछ जानकारी हासिल की है, जो मैं आपके साथ Shear कर रहा हूँ. Dr. A. P. J. Abdul Kalam जैसे अंतरिक्ष विज्ञान के महान वैज्ञानिक के बारे में कुछ जानकारी आप के साथ बाँट कर मुझे बहुत खुशी हो रही है. मैं आशा करता हूँ कि ये जानकारी आपको जीवन में Success (सफ़ल) होने की राह दिखलाएगी.
 

Biograpy of Dr. A. P. J. Abdul Kalam: डॉ. ऐ पी जे अब्दुल कलाम की जीवनी


पूरा नाम अबुल पाकिर जैनुलाबदीन अब्दुल कलाम
जन्म 15th अक्टूबर 1931
रामेश्वरम, रमानाथपुरम जिला, ब्रिटिश राज (मौजूदा तमिलनाडु, भारत)
मृत्यु 27th जुलाई 2015 (उम्र 83)
शिलोंग, मेघालय, भारत
विद्या सेंट जोसेफ कॉलेज, तिरुचिरापल्ली
अर्जन मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी
पेशा प्रोफेसर, लेखक, वैज्ञानिक एयरोस्पेस इंजीनियर
धर्म इस्लाम
वेबसाइट abdulkalam.com

Life Story of  “Dr. A. P. J. Abdul Kalam” in Hindi:

Abdul Kalam का जन्म 15th October 1931 को धनुषकोडी गाँव (रामेश्वरम, तमिलनाडु) में एक मध्यमवर्ग Muslim Family में हुआ. इनके Father जैनुलाब्दीन न तो ज़्यादा Educated नहीं थे, न ही Richest Man थे. इनके पिता मछुआरों को नाव किराये पर दिया करते थे. Abdul Kalam पुरे परिवार वालों के साथ रहते थे. उनके Family Member का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है, कि Abdul Kalam के स्वयं पाँच भाई एवं पाँच बहन थे और घर में तीन परिवार साथ में रहते थे.  Abdul Kalam के जीवन पर इनके पिता का बहुत प्रभाव रहा. वे भले ही पढ़े-लिखे नहीं थे, लेकिन उनकी लगन और उनके दिए संस्कार अब्दुल कलाम के बहुत काम आए. पाँच वर्ष की अवस्था में रामेश्वरम के पंचायत प्राथमिक विद्यालय में उनका दीक्षा-संस्कार हुआ था. उनके शिक्षक इयादुराई सोलोमन ने उनसे कहा था कि-

"जीवन मे सफलता तथा अनुकूल परिणाम प्राप्त करने के लिए तीव्र इच्छा, आस्था, अपेक्षा इन तीन शक्तियो को भलीभाँति समझ लेना और उन पर प्रभुत्व स्थापित करना चाहिए."

Abdul Kalam ने अपनी आरंभिक शिक्षा जारी रखने के लिए News Paper वितरित करने का कार्य भी किया. कलाम ने 1958 में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलजी से अंतरिक्ष विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की. स्नातक होने के बाद उन्होंने हावरक्राफ्ट परियोजना पर काम करने के लिये भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान में प्रवेश किया. 1962 में वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में आये जहाँ उन्होंने सफलतापूर्वक कई उपग्रह प्रक्षेपण परियोजनाओं में अपनी भूमिका निभाई. परियोजना निदेशक के रूप में भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी 3 के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई जिससे जुलाई 1982 में रोहिणी उपग्रह सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया गया था.

पुरस्कार एवं सम्मान:

Dr. A. P. J. Abdul Kalam के 79th Birthday को United State के द्वारा World Student Day के रूप में मनाया गया था. इसके आलावा उन्हें लगभग 40 University के द्वारा "मानद डॉक्टरेट" की उपाधियाँ प्रदान की गयी थीं. भारत सरकार (Govt. of India) के द्वारा उन्हें 1981 में "पद्म भूषण" और 1990 में "पद्म विभूषण" का सम्मान प्रदान किया गया, जो उनके द्वारा ISRO और DRDO में कार्यों के दौरान वैज्ञानिक उपलब्धियों के लिये तथा भारत सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार के रूप में कार्य हेतु प्रदान किया गया था.
1997 में Dr. A. P. J. Abdul Kalam साहब को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान "भारत रत्न" प्रदान किया गया. जो उनके वैज्ञानिक अनुसंधानों और भारत में तकनीकी के विकास में अभूतपूर्व योगदान हेतु दिया गया था.
वर्ष 2005 में Switzerland की Govt. ने Dr. A. P. J. Abdul Kalam के Switzerland आगमन के उपलक्ष्य में 26th May को "विज्ञान दिवस" घोषित किया. नेशनल स्पेस सोशायटी ने वर्ष 2013 में उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान सम्बंधित परियोजनाओं के कुशल संचलन और प्रबंधन के लिये "वॉन ब्राउन अवार्ड" से पुरस्कृत किया.


सम्मान का वर्ष
सम्मान/पुरस्कार का नाम
प्रदाता संस्था
1981 पद्म भूषण भारत सरकार
1990 पद्म विभूषण भारत सरकार
1994 विशिष्ट शोधार्थी इंस्टीट्यूट ऑफ़ डायरेक्टर्स (INDIA)
1997 भारत रत्न भारत सरकार
1997 इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय एकता पुरस्कार भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस
1998 वीर सावरकर पुरस्कार भारत सरकार
2000 रामानुजन पुरस्कार अल्वार्स शोध संस्थान, चेन्नई
2007 डॉक्टर ऑफ साइन्स की मानद उपाधि वूल्वरहैंप्टन विश्वविद्यालय, United Kingdom
2007 किंग चार्ल्स II मेडल रॉयल सोसायटी, United Kingdom
2007 डॉक्टर ऑफ साइन्स एण्ड टेक्नोलॉजी की मानद उपाधि कार्नेगी मेलन विश्वविद्यालय
2008 डॉक्टर ऑफ साइन्स (मानद उपाधि) अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़
2008 डॉक्टर ऑफ इन्जीनियरिंग (मानद उपाधि) नानयांग टेक्नोलॉजिकल विश्वविद्यालय, सिंगापुर
2009 वॉन कार्मन विंग्स अन्तर्राष्ट्रीय अवार्ड कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, (U.S.A.)
2009 हूवर मेडल A.S.M.I. फाउण्डेशन, (U.S.A.)
2009 मानद डॉक्टरेट ऑकलैंड विश्वविद्यालय
2010 डॉक्टर ऑफ इन्जीनियरिंग यूनिवर्सिटी ऑफ़ वाटरलू
2011 आइ॰ई॰ई॰ई॰ मानद सदस्यता I.E.E.E
2012 डॉक्टर ऑफ़ लॉज़ (मानद उपाधि) साइमन फ़्रेज़र विश्वविद्यालय
2014 डॉक्टर ऑफ़ साइन्स एडिनबर्ग विश्वविद्यालय, यूनाइटेड किंगडम

Top 10 Quotes of A. P. J. Abdul Kalam in Hindi: ऐ पी जे अब्दुल कलाम के 10 सर्वश्रेष्ठ अनमोल वचन

Quote 1.
महान सपने देखने वालों के महान सपने हमेशा पूरे होते हैं.
Dr. A. P. J. Abdul Kalam
Quote 2.
भगवान, हमारे निर्माता ने हमारे मष्तिष्क और व्यक्तित्व में असीमित शक्तियां और क्षमताएं दी हैं. इश्वर की प्रार्थना हमें इन शक्तियों को विकसित करने में मदद करती है.
Dr. A. P. J. Abdul Kalam
Quote 3.
यदि हम स्वतंत्र नहीं हैं तो कोई भी हमारा आदर नहीं करेगा.
Dr. A. P. J. Abdul Kalam
Quote 4.
क्या हम यह नहीं जानते कि आत्म सम्मान आत्म निर्भरता के साथ आता है ?
Dr. A. P. J. Abdul Kalam
Quote 5.
मैं हमेशा इस बात को स्वीकार करने के लिए तैयार था कि मैं कुछ चीजें नहीं बदल सकता.
Dr. A. P. J. Abdul Kalam
Quote 6.
इंतज़ार करने वालो को सिर्फ उतना ही मिलता है, जितना कोशिश करने वाले छोड़ देते है.
Dr. A. P. J. Abdul Kalam
Quote 7.
एक अच्छी पुस्तक हज़ार दोस्तों के बराबर होती है जबकि एक अच्छा दोस्त एक Library (पुस्तकालय) के बराबर होता है.
Dr. A. P. J. Abdul Kalam
Quote 8.
कृत्रिम सुख की बजाये ठोस उपलब्धियों के पीछे समर्पित रहिये.
Dr. A. P. J. Abdul Kalam
Quote 9.
शिखर तक पहुँचने के लिए ताकत चाहिए होती है, चाहे वो माउन्ट एवरेस्ट का शिखर हो या आपके पेशे का.
Dr. A. P. J. Abdul Kalam
Quote 10.
भारत में हम बस मौत, बीमारी , आतंकवाद और अपराध के बारे में पढ़ते हैं.
Dr. A. P. J. Abdul Kalam
 

Note:

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Tuesday, 2 February 2016

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Passion is Direct Way To Success : जुनून : सफलता का सीधा रास्ता...!!!

Passion is Direct Way To Success

Passion is Direct Way To Success:

आज के Young Generation में यह आम तौर पर यह देखा जाता है कि लोग Success होने का Shortcut ढूंढते है पर ऐसा कोई Shortcut है ही नहीं. अगर ऐसा होता तो आज लोग इतने बेरोजगार नहीं होते, सभी को कहीं न कहीं Success मिल ही जाती. 
                   
                   हम अक्सर सुनते हैं कि, “ Success होने के लिए कोई Shortcut नहीं होता, कड़ी मेहनत ही Success होने का राज़ है.” लेकिन, हमारी मेहनत हमारे Dreams पर निर्धारित करती है. मान लीजिए कि यदि कोई व्यक्ति Mumbai जा कर Film Actor बनना चाहे, तो उसे पहले यह समझना होगा कि देश भर से प्रतिदिन कम से कम Five Thousand लोग Mumbai Station पर Film Actor बनने का सपना ले कर उतरते हैं. उन हजारों में से गिने-चुने लोग ही Success हो पाते हैं. सफलता के भी कई आयाम हैं, कुछ आंशिक रूप से सफल हुए, तो कुछ लोग कुछ समय के लिए ही Success हो पाते हैं. तात्पर्य यह है कि इस क्षेत्र को चुनने पर “Risk Factor” काफी ज्यादा है. क्या आप उन हजारों में खुद को गिने-चुने लोगों में ला सकते हैं, जिनके लिए Success का दरवाजा खुल जाये??? 
                  यदि हाँ, तो आगे बढिए. लेकिन इसके लिए जो चीज चाहिए, वह है – “जुनून” आइये, इसे एक सच्ची कहानी से समझते हैं. इस Motivational Story में यह बतलाया गया है कि अगर कोई व्यक्ति Passion और लगन के साथ किसी काम में लग जाए तो उसे सफलता अवश्य ही मिलती है. यह एक True Story है, जो आपको Success होने की रह दिखलाता है.

Way To Success:

                 कई वर्ष पहले मेरठ में Cloth businessman की एक Family रहती थी. व्यापारी के बेटे को गाने-बजाने का शौकीन था. परिवार वाले चाहते थे कि वह प्रारंभिक Studies के बाद Family Business को संभाल ले. लेकिन, लड़के का मन Business में नहीं लगता था. वह अक्सर सोचता कि यदि ईश्वर ने मुझे सुप्रसिद्ध परिवार में जन्म दिया है, यदि मैं Family के Business में ही लग जाऊं, तो इसमें मेरी अपनी उपलब्धि क्या रही???
                    उसने निश्चय किया कि वह अपने दम पर अपनी पहचान बनायेगा. इसके लिए उसने Singer बनना ही Career चुन लिया. फिर उसने एक सच्चे गुरु की खोज की. कई गुरुओं के पास गया, लेकिन मन नहीं भरा. इस बीच Family को Business को लेकर Delhi जाना पड़ा. यहाँ भी Family का बहुत दबाव था कि लड़का Family Business में आ जाए, पर थक हारकर परिवार वालों ने उस लड़के को 2 Year का Ultimatum Time दिया. यदि इन दो सालों में कुछ नहीं कर पाये, तो Family Business में आना पड़ेगा. लड़का मन गया और एक मजबूत इरादे (Strong Wills) के साथ Mumbai की ओर निकल पड़ा. कई गीतकारों और संगीतकारों के पास गया. सबने कहा, आवाज़ तो अच्छी है पर नई आवाज़ के कारण Risk नहीं ले सकते. हालाँकि संगीतकार राम संपत ने लड़के को कहा, “Straggle (संघर्ष) करते रहो, Success अवश्य मिलेगी.” 
               वह जीवन बिताने और अपनी खर्च निकलने के लिए Hotels, Pub, Bar etc. में गाने लगा. शाम से देर रात तक होटलों में गाता और सुबह होते ही काम की तलाश में निकल पड़ता. तभी उसे पता चला कि संगीतकार राम संपत ने एक नामी Jewellery Company के Advertisement के जिंगल के लिए उस लड़के का नाम Offer किया. जिंगल के लिए पांच हज़ार रूपये मिलेंगे. पर शर्त यह भी थी कि अगर जिंगल पसंद नहीं आया तो एक पैसा नहीं मिलेगा. उस लड़के ने तुरंत हामी भर दी. Company को जिंगल बेहद ही पसंद आया. जब इसे Televisions में Broadcast किया गया, तो लाखों लोगों की Positive response आने लगी. Mumbai के एक फिल्म Producer ने उस लड़के को अपनी Film के गाने के लिए Signed किया. Producer की एक शर्त थी कि जब तक Film Release नहीं हो जाती, वह किसी और Film के लिए नहीं गायेगा. अभी Record चल रही थी, तभी उस लड़के को Superstar Shahrukh Khan की Company Dream Entertainment से Phone आया. Company उसे अपनी आगामी Film “चलते-चलते” के लिए Sign करना चाहती थी. वह Agreement के कारण मजबूर था. वह बेहद उदासीन हो कर बैठ गया और स्वयं को कोसने लगा. कुछ माह बाद, जब उस Producer की Film Release हुई, तो Film Flop हो गई, पर उस लड़के का गया हुआ गाना हर किसी के जुबान पर चढ़ गया. वह गाना था, “अल्ला के बन्दे” और उस लड़के का नाम था Kailash Kher.

Kailash Kher:


Kailash Kher ने एक बार कहा था कि, “जिंदगी आपको सब कुछ दे सकता है जिसकी आप Imagination करते हैं, पर उसकी वह भरपूर कीमत वसूलता है. यदि आप वह कीमत चुकाने को तैयार हैं, तो Success भी आपके कदम चूमने के लिए तैयार है.”

Abraham Lincoln: 


America के पूर्व President Abraham Lincoln ने कहा था, “अगर लगने लगे कि आपका लक्ष्य आपको हासिल नहीं हो पायेगा तो लक्ष्य को न बदलें, बल्कि अपने प्रयासों को बदलें.” Abraham Lincoln के इस ब्रह्मवाक्य का अर्थ है कि, “हमें मंजिल दे सकता है, जरुरत है अपने मन के मजबूत विश्वास की.” 

आप भी जुनून और लगन से किसी भी मुकाम को हासिल कर सकते है, लेकिन उसके लिए मेहनत शर्त है.

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Wednesday, 20 January 2016

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Importance of Simplicity In Life

Importance of Simplicity In Life
आज के इस दौर में जब कोई Person किसी भी जगह पर अगर उसे Success मिल जाती है तो वह अपनी सारी मान-मर्यादा को भूल जाता है और दिखावे कि जिंदगी व्यतीत करने लगता है. यदि आप Success और Reputation के शिखर पर पहुचने के पश्चात भी अपने अन्दर एक Simple Person को जीवित रख सकते हैं तो निश्चय मानें कि आप महानता की दहलीज पर खड़े खड़े होने कि सलाहियत रखते हैं. Success सिर चढ़ कर बोलती है और Success के नशे में चूर होकर व्यक्ति नीति निपुणता को भी भूल जाता है. लेकिन महानता हासिल करने वाले व्यक्ति चाहे सफलता के शीर्ष पर हों, तब भी वह अपनी सादगी और सफलता को नहीं छोड़ते हैं. पूरी दुनिया ऐसे लोगों कि महानता से भरा पड़ा है, जिन्होंने साधारण व्यक्ति कि तरह ही अपना Life Spend किया है. लेकिन असाधारण व्यक्ति सभी स्थितियों में सरल एवम् उदार मन होता है. एक True Story प्रस्तुत है, जिससे आप प्रेरणा (Inspiration) पा सकते हैं कि आपको किस प्रकार की Simple और Success Life जीना चाहिए:
 

Importance of Simplicity In Life:


माना जाता है कि व्यक्ति जितना बड़ा होता है उसका व्यहवार भी उतना ही सरल होता है. कहावत भी है कि “फलों से लदा वृक्ष ही धरती की ओर झुकना जनता है.” Gladston England के Prime Minister थे. उनकी गणना World के Famous Politicians में की जाती है. एक दिन वे घुमने निकले. एक Driver से उनकी भेंट हुई. उसने गाड़ी में लोहा भर रखा था. Gladston ने उसे मिलने वाले किराये आदि के बारे में पूछताछ की. इतने में रास्ते में एक टीला आ गया. घोड़े को गाड़ी खींचने में तकलीफ होने लगी. Gladston ने Driver से पूछा, “अब तुम क्या करोगे?” Driver ने कहा, “और क्या किया जा सकता है. कन्धा लगाना पड़ेगा.” Gladston बोले, “चलो मैं भी कंधा लगता हूँ.” गाड़ी टीले पर चढ़ गई. गाड़ी वाले ने उनका आभार माना. वे अपने रस्ते चले गए. आगे जाने पर Driver से एक आदमी ने कहा, “तुम जानते हो वह आदमी कौन था?” Driver बोला, “नहीं तो, मैं क्या जानूं?” उस आदमी ने कहा, “अरे वे Gladston थे अपने Country के Prime Minister.” Driver आश्चर्यचकित रह गया. ऐसी थी उस राष्ट्र के President की सादगी और सरलता.

आप समझ सकते हैं कि सादगी और सरलता के आभूषण धारण करने से आप अधिक मानवीय और अधिक Respected हो जाते हैं. यदि आप EGO का दामन थाम लेते हैं, तो आपके दामन में छिपे गुण एक-एक करके खत्म होते चले जाएँगे.
  • William Shakespeare के शब्दों पर गौर करें, “सादगी और सरलता वीर हृदयों की शोभा है और EGO का भाव कमज़ोर शरीरों में ही अधिक होता है.”

  • Swami Vivekananda ने भी सादगी और अहंकारिता के मध्य के अंतर को काफी सुन्दरता से रेखांकित किया है – “यदि तुमने EGO को त्याग कर सादगी को अपना लिया है तो किसी भी धर्म पुस्तक की एक पंक्ति भी पढ़े बिना और बिना किसी प्रार्थना गृह में पैर रखे तुम जहाँ भी बैठे हो वहीँ तुम्हे मोक्ष कि प्राप्ति हो जाएगी.”

  • Mahatma Gandhi ने भी इस प्रकार से कर्म के आधार पर व्याख्या कि है- “सरलता और सादगी यह है कि जो हम करतें है वह दुसरे भी कर सकते हैं. यदि हम इसे नहीं मानते तो हम अहंकारी हैं.”

सादगी और सरलता को यदि आप अपने Life में प्रथम स्थान प्रदान करना चाहते हैं तो आपको यह समझ लेना चाहिए कि इसे आप अपनी आदत ही बना लें. क्योंकि जितने कार्य आदत कि वजह से होते हैं उतने विवेक के कारण नहीं. विवेक का चाबुक स्वार्थी (Selfish) मन आपसे छीन सकता है. लेकिन आदत का समापन भाव कोई भी दुर्गुण नहीं छीन सकता.

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Saturday, 9 January 2016

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Power of Responsibility in Hindi

Power of Responsibility in Hindi
Responsibility एक ऐसा तथ्य है जो किसी भी इन्सान को जीवन में सफल होने की राह दिखलाती है. हर आदमी चाहता है कि लोग उसे पसंद करे. खासकर अपने साथ काम करने वालों और अपने Boss से मिला Encouragement उसे खुशी देता है. इस तरह के प्रोत्साहन पाने के बाद वह दुगुने उत्साह से काम कर पाता है. और अगर बहुत कुछ करने के बाद भी उसे बधाई न मिले तो वह मायुस (Disappointed) हो जाता है. लेकिन हम सभी यह जानते हैं कि किसी भी Situation में सभी लोगों को खुश करना Possible नहीं है. हर हल में कुछ लोग ऐसे होंगे जो Stupid, Uneducated, घमंडी... या अपनी सुविधा के पूर्वाग्रह के मुताबिक जो भी उन्हें ठीक लगेगा समझ सकते है.

Power of Responsibility in Hindi

अगर आपको अपनी Professional Responsibility पूरी करने के लिए ऐसे लोगों से मिलना पड़ता है जिन्हें आप बिल्कुल पसंद नहीं करते तो भी आपको उनसे मिलना पड़ेगा. लेकिन यह कमी आप अपने Personal Project से पूरी कर सकते हैं. खुद से सवाल कीजिए कि Really में आप किस तरह के हैं और किस तरह के लोगों के साथ रहना पसंद करते हैं? क्या आप किसी खास व्यक्ति से इसलिए मिलते हैं और उस के साथ समय बिताना पसंद करते हैं, क्योंकि दुसरे उसे पसंद करते हैं और वह काफी Popular है? सोंच-समझकर और अपनी Interest को ध्यान में रखकर ही अपनी Personal Project तैयार करें.

अपने व्यावसायिक (Business) कामकाज के लिए तो आपके लिए पसंद-नापसंद के हिसाब से सब कुछ तय करना मुमकिन नहीं. Professional Responsibilities निभाते समय ध्यान रखें कि आपको सिर्फ अपना काम पूरी Liability के साथ करते जाना है, हो सकता है आप कुछ के नजर में बहुत अच्छे Proved हों, हो सकता है कि आप हमेशा सबको खुश नहीं कर सकते. ऐसे लोगों की तलाश करें, जो आपको बहुत अच्छा समझते है. चूँकि हर आदमी आपको पसंद नहीं कर सकता, इसलिए आप ऐसे लोगों को चुनें, जिनके साथ रहने पर आपका Self-Confidence बढ़ता हो. जो आपको महसूस करवाते हों कि आप में भी कोई खास बात है. क्या आपने कभी Notice किया है कि कुछ लोगों के साथ रहते हुए आप अपने आपको ज्यादा Smart, Intelligent, Attractive और Qualified पाते हैं?

तब आप खासकर अपने आपको ज्यादा डरा हुआ महसूस कर रहे होते हैं, जब आपको लगता है कि कहीं लोग आपकी हकीकत न जान जाएँ यानि जब आप अपने बारे में कुछ छिपा रहे होते है. अपनी किसी खास बात को हम अपनी कमजोरी मान लेते हैं और फिर इसे छुपाने कि कोशिश करने लगते है. हम यह मान करा चलतें हैं कि इस बारे में अगर लोगों को पता चल गया तो वे हमारे बारे में गलत सोंच बना लेंगे. लेकिन तब यह हम यह भूल रहे होते है कि इस तरह हम अपने Self-Confidence को कमजोर कर रहें है. अपनी किसी Specialty को कमजोरी समझ लेना ठीक नहीं है.

Advertisement Agency में काम करने वाले शिखर को आज से Three Month पहले तक लगता था कि उसके अन्दर रचनात्मक (Constitutive) का आभाव है, जो कि इस Profession कि सबसे पहली जरुरत है. उसे लगने लगा था कि वह इस Profession में रह कर कभी Successful नहीं हो सकता. लेकिन Three Month पहले जब उसने नई Company Join की तो यहाँ उसे अपने Creative Director के साथ काम करते हुए महसूस हुआ कि पहले उसकी अपने बारे में जो सोच थी, वह पूरी तरह गलत थी. उसने तीन महीने में ही दो कामयाब Print Campaign Tire किए और जल्दी ही Advertising जगत में एक छोटी सी ही सही लेकिन मजबूत पहचान कायम कर ली. नए Creative Hand ने बिना किसी पूर्वाग्रह के रचनात्मक काम करने का मौका दिया उसने उसे पूरा कर दिखाया. यह इसलिए भी मुमकिन हुआ क्योंकि Boss ने उसे इस के काबिल समझ और उसे Encourage किया. ज्यादातर स्थितियों में आप अपने खोये हुए Self-Confidence को थोड़े जतन से वापस ला सकते हैं.

अतः अपने कार्य के प्रति समर्पित रहें और जो लोग आपके व्यावहारिक हितों कि पूर्ति करते हैं, उनके प्रति सदैव समर्पित रहें. आप अपने कार्य के द्वारा उन्हें खुश रखें, जो आप में ऐसी संभावना देख रहें हैं आप किसी भी Business अथवा किसी भी क्षेत्र में हों अपनी Responsibility अपने कार्य के माध्यम से कर सकतें हैं.


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Thursday, 31 December 2015

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Sanjay Sethi की Success Story (Co-Founder & C.E.O. of Shopclues) in Hindi

आज के युवाओं कि सबसे बड़ी Problem यह है की हम कुछ अलग करने की नहीं सोचते हैं. India में यह बहुत बड़ी समस्या है की आज हमें जो कुछ भी मिल जाता है उस पर ही संतुष्ट हो जाते हैं खुद से कुछ हांसिल करने कि कोशिस नहीं करते. हमारे जीवन में कुछ अलग करने कि ललक है ही नहीं. लेकिन यह बात किसी महापुरुष ने कहा है कि “जिसके जीवन में कुछ अलग करने कि चाह न हो और वह अपनी घिसीपिटी जिंदगी से ही खुश हो तो वह आदमी कभी भी Success के मुकाम को हांसिल नहीं कर सकता.”

आईये हम जानते हैं Sanjay Sethi के बारे में जानते हैं जिन्होंने अपनी जिंदगी में कुछ अलग करते हुए Shopclues जैसी Online Marketing Company की नीव रखी और उसे सफलता की ऊंचाई तक उसे पहुँचाया.

Success Story of Sanjay Sethi (Co-Founder & C.E.O. of Shopclues)

America में बेहतरीन Career छोड़कर Sanjay Sethi India लौटे और अपने चार दोस्तों के साथ शुरु कि अपनी नई Company. महज चार साल के अन्दर Shopclues ने Online Market में बनाई खास जगह.

पढाई कुछ और ही की थी रास्ता कुछ और चुन लिया. और जो रास्ता चुना, उस पर Success की ऐसी Story दर्ज करते गए कि आज उनकी Story सब सुन रहे हैं.

Shopclues के Co-Founder और C.E.O. Sanjay Sethi ने महज चार साल पहले 2011 में इस Online Market – Shopclues की शुरुआत की थी. आज कि भागमभाग भरी जिंदगी में जब किसी के पास Market जाने का वक्त नहीं है, दिन के 24 घंटों में से केवल नींद के समय को छोड़ कर लोग हर समय Mobile और Computer पर Online रहते हैं. ऐसे में बाजार खुद उनके घर आ गया है. Sanjay कहते हैं, “Shopclues अन्य Websites से इसी मायने में अलग है, Shopclues Shopping Mall और बड़ा बाज़ार कि तरह है जहाँ सबके लिए सबकी जरुरत और खरीद क्षमता के मुताबिक सब कुछ मिलता है.”

Uttar Pradesh के शहरों Allahabad, Varanasi, Jhansi और Lucknow में जब Sanjay बड़े हो रहे थे तो Computer और हमारी जिंदगी में इतने तूफानी ढंग से Enter नहीं हुआ था. एक सामान्य Middle Class Family के मेधावी बच्चे कि तरह B.H.U से Mechanical Engineering कि पढाई की और SAIL (Steel Authority of India Limited) में नौकरी करने लगे. लेकिन दिल के अन्दर अगर कोई बेचैनी हो और हमेशा कुछ नया सीखते रहने कि ललक हो तो कोई इन्सान कैसे शांत बैठ सकता है. 1996 में IIT Delhi में पहली बार Computer Science में एक साल का एक Course शुरू किया. Sanjay उसके पहले Batch के Student थे. उन्ही के शदों में, “Computer तब नया-नया आया था. IIT में पढने के बाद मेरी जिंदगी कि दिशा बदल गई. फिर मैंने Mechanical Engineering की तरफ पलट कर नहीं देखा”

इसके बाद Sanjay America चले गए. और 14 साल के लिए वहीँ के हो कर रह गये. California में Ebay में काम करने के दौरान उनके मन में अपना कुछ काम करने का खायाल आया वे कहते हैं, “Ebay तब World का सबसे बड़ा Online Market था, लेकिन वहाँ काम करना बहुत ही Boring हो गया था. Ebay India के Online Market को पकड़ने में भी नाकाम रहा था. ऐसा न होता तो Flipkart, Snapdeal जैसी Companies के जमीन नहीं तैयार होती.

Sanjay को लग रहा था कि Indian Online Market का एक बड़ा सा हिस्स अभी भी अनछुआ है. पर America छोड़ने का फैसला आसन नहीं था. उसके पास America की नागरिकता (Citizenship) थी. Job, Safety, बच्चों का बेहतर Future. India लौटने का मतलब था इन सब को दाव पे लगा देना, लेकिन आखिरकार Sanjay ने कठिन रास्ता चुना.Sanjay ने अपने दोस्तों Sandeep, Radhika Agarwal और Mrinal Chatterjee के साथ मिलकर Gurgaon में महज 800 Sq.Ft. की जगह में अगस्त, 2011 में Shopclues की शुरुआत कि. एक साल बाद January 2012 में जब Shopclues पहली बार Online हुआ तो उनके यहाँ महज 15 लोगों की Team थी. पहले दिन उनके पास 2 Order आए थे. Sanjay उन दिनों की याद करते हैं, “शुरू में तो दिन के 3-4 Order ही आते थे. कई बार तो दिन भर में एक भी Order नहीं होता था”

उस दिन से लेकर आज Shopclues की कहानी कुछ यूँ बदली है कि अब Everyday 80,000 से लेकर 1 Lakh 50 Thousand तक Order आते हैं. महज 20 Merchant से शुरू हुआ सफ़र 3 Lakh Merchant पर पहुँच गया है. Sanjay बताते हैं, “इस साल के अंत तक Merchant की संख्या 5 Lakh से ऊपर हो जाएगी.” कंपनी में 1,000 Employee हैं. सारी Saving लगाकर शुरू की गयी Company इस vittवर्ष के अंत तक 1.2 Billion Rupees की हो जाने की उम्मीद है.

आखिरकार ऐसा क्यूँ है कि जब इतनी संख्या में बड़े खिलाड़ी Online Marketing में दांव आजमा रहे हैं, तब भी Shopclues की Development और Reputation बढती जा रही है. Sanjay ने कहा कि, “उसका कारण है Trust और अपने Customers के साथ एक Emotional Relations.”

वे एक घटना का ज़िक्र करते हैं: “January में Company शुरू हुई थी और February में ठीक Valentine Day के मौके पर हम Problem में फंस गए. हमारे पास 300 Bouquet के Order थे और दुकानवाला आखरी मौके पर भाग गया . हमारी विश्वसनीयता (Reliability) दांव पर लगी थी. आख़िरकार हम खुद भागे-भागे Old Delhi के Market में गये और एक साथ 300 Teddy Bear और Chocolate के Packet खरीद लाये. पूरी रात जागकर उन्हें Pack किया और Customers के सन्देश के और अपने माफीनामे के साथ उन्हें भेजा.” उस दिन को याद करते हुए उनकी आँखें उत्साह से चमकने लगती हैं, “रातोरात Three Hundred Packet तैयार करके Courier किए गये थे.” इस घटना का Positive Effects पड़ा. Social Media पर भी Shopclues के पक्ष में एक माहौल तैयार हुआ. Shopclues ने India में Online Market के स्वरुप को बिल्कुल बदलकर रख दिया. यह इसी कि बदौलत संभव हो सका कि आज एक छोटे शहर के मामूली दुकानदार के लिए भी अपने Products को Online बेचना संभव हो गया है. Sanjay कहते हैं, “हमारा Focus ही Two और Three टियर शहरों पर हैं. महानगरों से ज्यादा बड़ा बाज़ार वहां है. बेचने और खरीदने वाले दोनों. लेकिन ज़रूरत है कि उनकी खरीद क्षमता के मुताबिक Products उन तक पहुंचाने कि.” Shopclues यह काम बखूबी कर रहा है.



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Tuesday, 29 December 2015

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The key of Success - Positive Thinking सकारात्मक सोंच In Hindi Motivational Story

Unsuccessful को Success बनाने में Positive Thinking का महत्व ही सबसे ज्यादा होता है. आज लोगों के दिमाग में यह Negative Thinking घर कर जाती है की Success को पाना बहुत ही मुस्किल काम है
लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है अगर आप Positive Thinking के साथ कड़ी मेहनत करें तो Success को पाना बिल्कुल ही आसन हो जायेगा और इतना ही नहीं Success आपके कदम चूमेगी. “यह बिल्कुल भी Important नहीं है कि कल आप क्या थे अथवा आज आप क्या हैं और किस Stage पर हैं. सबसे Important यह है कि आप कल के लिए क्या सोचते हैं और कल क्या बनना चाहते हैं.”

आज के दौर में जहाँ Youngsters के सामने Jobs की Problem Monster का रूप धारण किए हुए खड़ी है, वहां उनका जल्दी ही Disappointed हो जाना तथा उचित Job न मिलने पर Frustration से भर जाना सामान्य सी बातें हैं. इस स्थिति से Self-Confidence, स्वप्रेरणा, Struggle करने की क्षमता, जल्दी Decision लेने की Ability तथा Situations के हिसाब से खुद को ढालने की कला ही छुटकारा दिला सकती हैं, ये गुण छोटे या मामूली Realized हो सकते हैं, परन्तु लोगों को प्रायः यह अहसास नहीं हो पाता है कि उनमें ये गुण कितनी क्षमता (Efficiency) के साथ Present हैं. यदि हम Struggle Efficiency की बात करें तो ऐसे हजारों उदाहरण दिख जाएँगे, जब किसी व्यक्ति ने अत्यंत छोटे स्तर से काम शुरु करके Unlimited Heights हासिल कीं. हर प्राणी में विषम Situations से जूझने की अदम्य Power होती है. जरुरत है खुद को पहचानने की और Life में संघर्ष से भागने के बजाय Positive Thinking पैदा करने की. यदि व्यक्ति अपने जीवन के हर मोड़ पर Positive Thinking रखे तो पता चलेगा कि उसकी आधी से ज्यादा Problems तो खुद-ब-खुद Solved हो गई.

आशंकाओं के साथ किया हुआ कोई भी काम Success नहीं होता, जबकि Good Thinking के साथ किया गया कोई भी प्रयास कभी भी Unsuccessful नहीं होता. World में दो ही प्रकार के लोग हैं, एक वह जो Successful हैं और दुसरे वह जो Unsuccessful हैं. लेकिन आपको यह सोचना चाहिए कि कुछ व्यक्ति Unsuccessful क्यों होते हैं और कुछ लोग Always Successful कैसे हो जाते हैं? इसके पीछे प्रमुख कारण होता है व्यक्ति का नजरिया. काम और जीवन के प्रति व्यक्ति का दृष्टिकोण उसके आगे बढ़ने या पीछे हटने में Effective Role निभाता है. आप किसी काम में कितने भी निपूर्ण क्यों न ह्नों, आपकी योग्यता चाहे जो हो और आपकी रूचि रुझान कुछ भी हो, जो चीज आपकी Success सुनिश्चित करती है, वह है आपका Attitude.

लेकिन हम में से कितने लोग अपने काम को उत्साहपूर्वक कर पाते हैं? बहुत काम. फिर भी हम कहते हैं कि फलां Interview में नहीं चुने गए या Promotion नहीं पा सके. हारने से जीत मिलती हो ऐसा तो नहीं है फिर भी कुछ खोकर कुछ तो प्राप्त किया जा सकता है, यह बात विरोधाभासी लग सकती है, लेकिन है नहीं. हम मनुष्य हैं और थोड़ी बहुत असफलता मिलना आम बात है. कोई भी व्यक्ति अपने सारे कामों में 100% Success नहीं पा सकता.

जीवन में कभी न कभी हर कोई Unsuccessful होता है. दूसरे शब्दों में असफलताओं के Pillars पर ही टिकी होती है Success. विजेता हार-जीत के अपने अनुभावों को Analysis करके अपने लिए Success होने का Formula खोज लेतें हैं. इसके अनुरूप ही वे अपने Behavior और कार्य में सुधर ला पाते हैं. फर्क सिर्फ यह होता है कि एक Winner जब कोई Mistake करता है तो उसे Accept कर लेता है कि हाँ मुझसे गलती हुई और एक Unsuccessful Person कहता है कि यह मेरी गलती नहीं थी.



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