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Monday, 16 May 2016

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सही लक्ष्य साधिए: Target

Target
आज मैं आपलोगों के सामने ऐसी बात रखने जा रहा हूँ जो कि जीवन में इस बात को लेकर बहुत सारी दुविधाएँ होती है कि – अपना लक्ष्य कैसे चुने. कभी भी बड़ा आदमी बनने के लिए बड़ा सोच रखना जरुरी है और साथ ही साथ उस लक्ष्य को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत कि आवश्यकता होती है. अगर आपकी सोच बड़ी है पर आपकी मेहनत आपके सोच के मुवाफ़िक़ काम है तो आप को सफलता नहीं मिल सकती.

सही लक्ष्य साधिए:

एक Doctor वर्षों Struggle करने के बाद कार-बंगला भी रखता है, सुसज्जित माकन में रहता है, अच्छे वस्त्र पहनता है. बड़े-बड़े आदमी उसके यहाँ आते हैं, उसका वैभव (Glory) हर बात से प्रकट होता है. उसकी तड़क-भडक देखते ही College से निकले हुए एक नए युवक को प्रलोभन होता है कि यदि व्यवसाय है तो डॉक्टर का ही है. दुसरे दिन मोटर कार में घूमते हुए वह Engineer को देखता है, तब उसको विचार होता है कि यदि पेशा अच्छा है तो Engineering का है. उसको सफल प्रयत्न करने वाले नित नए मनुष्य दिखाई देते हैं और उसको नित नई कमाना सताती है. वह असमंजस में पड़ जाता है कि यह पेशा अच्छा है या वह पेशा. उसको इस लुभावनी तड़क-भड़क पर मोहित होने से पहले यह विचार कर लेना चाहिए कि डॉक्टर साहब या इंजिनियर साहब ने उस तड़क-भड़क, मान-मर्यादा को वर्षों कठिनाइयाँ झेलकर प्राप्त किया है. अपने पेशे में सफल होने के लिए उनको न जाने कितने कष्ट उठाने पड़े होंगे; वे एक ही दिन में समृद्धि (Prosperity) को प्राप्त नहीं हो गए थे.

लक्ष्य किस प्रकार बनाया जाए, यह एक विचारणीय बात है. प्रश्न यह है कि कौन सा पेशा स्वीकृत किया जाए? अपने बड़े-बूढों की सम्मति से या अपने अंतः करण की प्रेरणा से या मित्रों के कहने से या अपनी प्राकृतिक जन्मस्थिति से अपना Target या Goal बनाना चाहिए? इस प्रश्न का यथार्थ उत्तर देना अत्यंत कठिन है. मेरा मानना है कि सर्वप्रथम अपनी प्राकृतिक जन्मस्थिति को देखते हुए ही अपना लक्ष्य बनाना चाहिए; क्योंकि व्यवसाय की तुच्छता कोई वस्तु नहीं है. एक झाड़ू देने वाला जमादार भी खुश व सुखी हो सकता है, जबकि एक राजकुमार (Prince) वैभव और ऐश्वर्य से घिरा हुआ होता है, वह राजमहल (Palace) में हो रहे अवसरों से पूरा लाभ उठाने के बा-वजूद भी उसे दुःख का अनुभव हो सकता है.

जन्मस्थिति के अतिरिक्त लक्ष्य बनाने में अनुभव भी हमारा सहायक हो जाता है. अंतः करण की पुकार हमें सही मार्ग सही पर ला देती है, परन्तु संलग्नता और एकाग्रता के बिना हमें किसी भी मार्ग पर, किसी भी व्यवसाय में सफलता प्राप्त नहीं हो सकती है.

जीवन में सफलता की कामना करने वाले व्यक्ति को चाहिए कि वे संलग्नता और एकाग्रता की विचित्र शक्तियों को अपने आप में विकसित करें, ठीक उसी तरह जैसे- किसान अपनी फसल की और सांप अपने मणि कि हिफाजत करता है.

Note:

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Saturday, 6 February 2016

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Positive Thinking Can Change Your “Life” अच्छी सोंच _जो_ बदल दे आपकी जिंदगी...


Positive Thinking Can Change Your “Life”

अच्छी सोंच जो_ बदल दे आपकी जिंदगी...!!!  
 
मैं यह कहता हूँ कि जो आपको स्वयं के लिए पसंद नहीं वह Behavior दूसरों के साथ भी न करें. बच्चा जब बोलना सिख जाता है, तो यह मान लेना चाहिए कि उसने व्यहवार करना Start कर दिया है. लेकिन उसे Public Behavior की पहली शिक्षा कहाँ से प्राप्त होगी? जाहिर है कि आपका बच्चा Social Behavior के लिए अपने घर को ही School के रूप में चुनने वाला है. अतः बच्चा जब बोलना सिख जाता है तो चीजों को समझने भी लगता है. 
 
प्रत्येक बच्चा अनुकरण (Emulation) करता है या Repeat करता है. यदि आपके घर का माहौल Friendly Social Behavior का Example है तो आपके घर का बच्चा भी उसी को दोहराएगा. लेकिन Unfortunately ऐसा नहीं है तो फिर बच्चे के Behavior में विसंगति उत्पन होना आरम्भ हो जाती है. Public Behavior की पहली पाठशाला आपका घर है. इस प्रथम सिद्धांत का ध्यान आप रखें तो यह सिद्धांत आपके बच्चों के संस्कारित लोक व्यहवार का ध्यान रखेगा.
 

Positive Thinking Can Change Your “Life” Hindi Story:

मैं एक बच्चे से सम्बंधित एक Interesting संस्मरण यहाँ देना चाहूँगा. तब उसकी उम्र महज ग्यारह साल थी. उसका Birthday गुजरे एक सप्ताह ही हुआ था. उसके पिता एक शाम घर का खर्च का Calculation कर रहे थे. उसकी माँ ने कहा कि रोहन (पुत्र) के Birthday के खाते में एक हज़ार रूपया और लिख लीजिये. रोहन के पिता चौक गये क्योंकि Birthday में हुए खर्च का हिसाब वो लिख चुके थे. तब उसकी पत्नी से जानकारी मिली कि रोहन ने अपने Birthday पर Cricket Club के बच्चों को हज़ार रूपये की Party अलग से दे दी थी. हमारे दुकानदार के Bill में ही वह राशि लिखी हुई थी. सारा Matter समझ कर रोहन के पिता मुस्कुरा उठे. उसकी पत्नी जो ध्यान में उसके चेहरे को देख रही थी, वह उस मुस्कान पर चौक गई. उसने रोहन के पिता से सवाल किया कि क्या आप रोहन के इस हरकत से Angry नहीं हैं? सवाल वाजिब था. लेकिन वो बिल्कुल भी नाराज़ नहीं थे. 
 
फिर उसने रोहन की माँ को बताया कि इन्सान अपनी संतान के Birthday पर स्वयं ख़ुशी मनाता है. अब यदि वही संतान अपने Birthday की ख़ुशी खुद मनाए तो क्या खर्च की चिंता के कारण नाराजगी (Unhappiness) व्यक्त करना उचित होगा? 
 
क्या आप बच्चे की ख़ुशी में ख़ुशी अनुभव करते हैं? क्या आप बच्चे की खुशी को स्वयं Control करना चाहते हैं? क्या यह बेहतर नहीं होगा कि बच्चे के Birthday पर बच्चे से ही पूछा जाए कि वह अपना Birthday किस तरह से मनाना चाहता है? इस तरह हम बच्चों को चयन करने का Authority (Power) देते हैं. उसे निर्णय करने की Freedom देते हैं. इस प्रकार आप अपने बच्चे की ख़ुशी में खुश होते हैं, यह फैसला आप स्वयं कर सकते है. 
 
अपने प्रियजनों को अपनी ख़ुशी में शरीक करने से ज्यादा अच्छा है कि आप प्रियजनों की ख़ुशी में सम्मिलित होने का अंदाज़ सीखें. अंतः यह जीवन की छोटी-छोटी Events ही हैं, जो हमें बतलाती हैं कि हमारा Behavior कैसा होना चाहिए. वह आदमी अपने बच्चे द्वारा किए गए खर्च को फिजूलखर्ची (Extravagance) करार देकर नाराज़ भी हो सकता था. लेकिन क्या ऐसा करना उचित होता? यदि उसके बेटे ने अपनी मर्ज़ी से अपनी खुशी के लिए कुछ खर्च किया था तो क्या उसे अपने बेटे की ख़ुशी का ख्याल नहीं रखना चाहिए था? ज्यादातर मामलों में माता-पिता चाहते हैं कि बच्चे उनकी ख़ुशी की पूर्ति करें. लेकिन क्या बच्चों की ख़ुशी के अनुसार माता-पिता नहीं चल सकते हैं? 
 
आज के युग में अभिभावक यह समझते हैं कि, “बच्चों को अपना हित-अहित मालूम नहीं है और इसी कारण उनके Future Related Decision भी अभिभावकों ख़ुद ही कर लेते हैं.” एक Doctor चाहता है कि उसका बेटा उसी की भातिं Doctor बने. यदि कोई Doctor अपने Profession में संतुष्ट नहीं है तो वह चाहता है कि उसका बेटा Doctor नहीं बने. लेकिन हम अपने ही बच्चे की Natural Talent के सम्बन्ध में कोई विचार नहीं करते हैं.
 
इस प्रकार हम अपने ही बच्चे के साथ न्याय नहीं कर पाते हैं. हम सपना यही देखते हैं कि शिक्षा का उद्देश्य प्रमुख रूप से धन कमाना होना चाहिए. फिर चाहे उस शिक्षा में बच्चों की रूचि हो या न हो. यहाँ आवश्यक हो जाता है कि हम अपने Behavior को सुधारें और अपने बच्चों को यह आज़ादी दें कि वह अपने Career के सम्बन्ध में अपने Guardian के साथ चर्चा कर सकें. जब तक हम Public Behavior के Rules को घर में लागू नहीं कर सकते, उन्हें दुनिया पर लागू करना भी बेमानी ही होगी…!!!
 
 

आपको

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Thursday, 21 January 2016

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Memory of Childhood in Hindi

Memory of Childhood
आज हम चाहे उम्र के जिस भी पड़ाव में हों, जिस भी मुकाम पर हों, लेकिन कहीं न कहीं हमारे दिल के अन्दर बचपन कि यादें छिपी होती है. हम अपने दोस्तों से यह बात Shear भी करतें हैं कि मैं बचपन में बहुत ही शरारती था और बहुत बदमाशियां किया करता था. हम अपने बचपन में हुई घटनाओं को याद कर के खुश होतें हैं, और मन-ही-मन मुस्कुरातें हैं. तो आइये हम अपनी बचपन की यादों को ताज़ा करतें है: 


बचपन मे 1 रूपये की पतंग के पीछे ; 
2 K.M तक भागते थे ; 
न जाने कितने चोटे लगती थी ; 
वो पतंग भी हमे बहोत दौड़ाती थी ; 
आज पता चलता है ; 
दरअसल वो पतंग नहीं थी ; 
एक Challenge थी ; 
खुशीओं को हांसिल करने के लिए दौड़ना पड़ता है ; 
वो दुकानो पे नहीं मिलती ; 
शायद यही जिंदगी की दौड़ है ...!!! 

जब बचपन था, तो जवानी एक Dream था ; 
जब जवान हुए, तो बचपन एक Dream है...!!! 

जब घर में रहते थे, आज़ादी अच्छी लगती थी ; 
आज आज़ादी है, फिर भी घर जाने की जल्दी रहती है...!!! 

कभी होटल में जाना Pizza, Berger खाना पसंद था ; 
आज घर पर आना और माँ के हाथ का खाना पसंद है...!!!  

School में जिनके साथ झगड़ते थे ; 
आज उनको ही Internet पे तलाशते है...!!!  

ख़ुशी किसमे होतीं है, ये पता अब चला है ; 
बचपन क्या था, इसका एहसास अब हुआ है...!!! 

काश बदल सकते हम ज़िंदगी के कुछ साल ; 
काश जी सकते हम, ज़िंदगी फिर एक बार...!!! 

जब हम अपने शर्ट में हाथ छुपाते थे ; 
और लोगों से कहते फिरते थे ; 
देखो मैंने अपने हाथ जादू से हाथ गायब कर दिए…!!! 
  
जब हमारे पास चार रंगों से लिखने ; 
वाली एक पेन हुआ करती थी और हम ; 
सभी के बटन को एक साथ दबाने ; 
की कोशिश किया करते थे…!!! 

जब हम दरवाज़े के पीछे छुपते थे ; 
ताकि अगर कोई आये तो उसे डरा सके…!!! 

जब आँख बंद कर सोने का नाटक करते थे ; 
ताकि कोई हमें गोद में उठा के बिस्तर तक पहुचा दे…!!! 

सोचा करते थे कि ये चाँद 
हमारी साइकिल के पीछे पीछे 
क्यों चल रहा हैं...!!! 

On/Off वाले Switch को बीच में ; 
अटकाने की कोशिश किया करते थे...!!! 

फल के बीज को इस डर से नहीं खाते थे कि ; 
कहीं हमारे पेट में पेड़ न उग जाए...!!!  

Birthday सिर्फ इसलिए मनाते थे ; 
ताकि ढेर सारे Gift मिले…!!! 

FRIG को धीरे से बंद करके ये जानने 
की कोशिश करते थे कि ; 
इसकी Light कब बंद होती हैं…!!!   

बचपन में सोचते थे कि ; 
हम बड़े क्यों नहीं हो रहे ? 
और अब सोचते हम बड़े क्यों हो गए ???

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Memory of Childhood

ये दौलत भी ले लो…

ये शोहरत भी ले लो…

भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी...

मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन…

वो कागज़ की कश्ती वो बारिश का पानी…!!!


 

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बचपन की ये Lines जिन्हे हम दिल से गाते-गुनगुनाते थे ;

और खेल खेलते थे तो याद ताज़ा कर लीजिये ...!!!


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▶मछली जल की रानी है ;
जीवन उसका पानी है ;
हाथ लगाओ डर जायेगी ;
बाहर निकालो मर जायेगी…!!!
 
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▶ पोशम्पा भाई पोशम्पा ;
सौ रुपये की घडी चुराई ;
अब तो जेल मे जाना पडेगा ;
जेल की रोटी खानी पडेगी ;
जेल का पानी पीना पडेगा ;
थै थैयाप्पा थुशमदारी बाबा खुश…!!!  

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▶ आलू-कचालू बेटा कहाँ गये थे ;
बन्दर की झोपडी मे सो रहे थे ;
बन्दर ने लात मारी रो रहे थे ;
मम्मी ने पैसे दिये हंस रहे थे…!!!  

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▶ आज सोमवार है ;
चूहे को बुखार है ;
चूहा गया डाक्टर के पास ;
डाक्टर ने लगायी सुई ;
चूहा बोला उईईईईई…!!!  

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▶ झूठ बोलना पाप है ;
नदी किनारे सांप है ;
काली माई आयेगी ;
तुमको उठा ले जायेगी…!!!  

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▶ चन्दा मामा दूर के ;
पूए पकाये गुड़ के ;
आप खाएं थाली मे ;
मुन्ने को दे प्याली में…!!!  

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▶ तितली उड़ी ;
बस मे चढी ;
सीट ना मिली ;
तो रोने लगी ;
ड्राईवर बोला ;
आजा मेरे पास ;  
तितली बोली  ;
“हट बदमाश”…!!!  

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▶ मोटू सेठ ;
पलंग पर लेट ;
गाडी आई फट गया पेट ;
गाड़ी का नम्बर 88 ;
चल मेरी गाड़ी India Gate ;
India Gate से आई आवाज ;
चाचा नेहरु जिंदाबाद…!!!

********


अगर उपर लिखे Lines को पढ़ कर आपको  अपने बचपन के दिनों की याद आई हो तो इस Post में Comment जरुर करें ; और Share भी करें,

इससे आपकी बचपन कि याद भी ताज़ा हो जाएगी!!!


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Wednesday, 20 January 2016

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Importance of Simplicity In Life

Importance of Simplicity In Life
आज के इस दौर में जब कोई Person किसी भी जगह पर अगर उसे Success मिल जाती है तो वह अपनी सारी मान-मर्यादा को भूल जाता है और दिखावे कि जिंदगी व्यतीत करने लगता है. यदि आप Success और Reputation के शिखर पर पहुचने के पश्चात भी अपने अन्दर एक Simple Person को जीवित रख सकते हैं तो निश्चय मानें कि आप महानता की दहलीज पर खड़े खड़े होने कि सलाहियत रखते हैं. Success सिर चढ़ कर बोलती है और Success के नशे में चूर होकर व्यक्ति नीति निपुणता को भी भूल जाता है. लेकिन महानता हासिल करने वाले व्यक्ति चाहे सफलता के शीर्ष पर हों, तब भी वह अपनी सादगी और सफलता को नहीं छोड़ते हैं. पूरी दुनिया ऐसे लोगों कि महानता से भरा पड़ा है, जिन्होंने साधारण व्यक्ति कि तरह ही अपना Life Spend किया है. लेकिन असाधारण व्यक्ति सभी स्थितियों में सरल एवम् उदार मन होता है. एक True Story प्रस्तुत है, जिससे आप प्रेरणा (Inspiration) पा सकते हैं कि आपको किस प्रकार की Simple और Success Life जीना चाहिए:
 

Importance of Simplicity In Life:


माना जाता है कि व्यक्ति जितना बड़ा होता है उसका व्यहवार भी उतना ही सरल होता है. कहावत भी है कि “फलों से लदा वृक्ष ही धरती की ओर झुकना जनता है.” Gladston England के Prime Minister थे. उनकी गणना World के Famous Politicians में की जाती है. एक दिन वे घुमने निकले. एक Driver से उनकी भेंट हुई. उसने गाड़ी में लोहा भर रखा था. Gladston ने उसे मिलने वाले किराये आदि के बारे में पूछताछ की. इतने में रास्ते में एक टीला आ गया. घोड़े को गाड़ी खींचने में तकलीफ होने लगी. Gladston ने Driver से पूछा, “अब तुम क्या करोगे?” Driver ने कहा, “और क्या किया जा सकता है. कन्धा लगाना पड़ेगा.” Gladston बोले, “चलो मैं भी कंधा लगता हूँ.” गाड़ी टीले पर चढ़ गई. गाड़ी वाले ने उनका आभार माना. वे अपने रस्ते चले गए. आगे जाने पर Driver से एक आदमी ने कहा, “तुम जानते हो वह आदमी कौन था?” Driver बोला, “नहीं तो, मैं क्या जानूं?” उस आदमी ने कहा, “अरे वे Gladston थे अपने Country के Prime Minister.” Driver आश्चर्यचकित रह गया. ऐसी थी उस राष्ट्र के President की सादगी और सरलता.

आप समझ सकते हैं कि सादगी और सरलता के आभूषण धारण करने से आप अधिक मानवीय और अधिक Respected हो जाते हैं. यदि आप EGO का दामन थाम लेते हैं, तो आपके दामन में छिपे गुण एक-एक करके खत्म होते चले जाएँगे.
  • William Shakespeare के शब्दों पर गौर करें, “सादगी और सरलता वीर हृदयों की शोभा है और EGO का भाव कमज़ोर शरीरों में ही अधिक होता है.”

  • Swami Vivekananda ने भी सादगी और अहंकारिता के मध्य के अंतर को काफी सुन्दरता से रेखांकित किया है – “यदि तुमने EGO को त्याग कर सादगी को अपना लिया है तो किसी भी धर्म पुस्तक की एक पंक्ति भी पढ़े बिना और बिना किसी प्रार्थना गृह में पैर रखे तुम जहाँ भी बैठे हो वहीँ तुम्हे मोक्ष कि प्राप्ति हो जाएगी.”

  • Mahatma Gandhi ने भी इस प्रकार से कर्म के आधार पर व्याख्या कि है- “सरलता और सादगी यह है कि जो हम करतें है वह दुसरे भी कर सकते हैं. यदि हम इसे नहीं मानते तो हम अहंकारी हैं.”

सादगी और सरलता को यदि आप अपने Life में प्रथम स्थान प्रदान करना चाहते हैं तो आपको यह समझ लेना चाहिए कि इसे आप अपनी आदत ही बना लें. क्योंकि जितने कार्य आदत कि वजह से होते हैं उतने विवेक के कारण नहीं. विवेक का चाबुक स्वार्थी (Selfish) मन आपसे छीन सकता है. लेकिन आदत का समापन भाव कोई भी दुर्गुण नहीं छीन सकता.

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Sunday, 27 December 2015

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Self-Confidence And Self-Dependent Hindi Motivational Story

जो व्यक्ति Struggle करने से पूर्व ही भैभित हो जाता है, वह संघर्ष को कभी पर नहीं कर सकता. जो व्यक्ति शारीर से कमजोर हो लेकिन जिसके पास पहाड़ कि काया-सा Self-Confidence हो, वह हारी हुई बजी भी जीत लेता है. यही लोग हैं जो Tables Turn करके पूरे World को चौका कर देते हैं. इसी प्रकार Self-dependent Person भी शंका रहित होकर कोई काम करता है तो कभी भी किसी काम में Unsuccessful नहीं होता.

जो व्यक्ति Self-Respect के बल पर आत्मविश्वासी होकर आत्मनिर्भर बन जाते हैं तो वे अहंकारी (Overrated) नहीं कहलाते. John Colhm को Study करते हुए देखकर College के एक Student ने उसका मजाक उड़ाया तो John Colhm ने उससे कहा, “मुझे अपने समय का इस प्रकार उपयोग करने कि आवश्यकता है कि मैं Congress यानि विधानसभा (Assembly) में अच्छी तरह से काम कर सकूँ.” यह सुनकर वह Student और ज़ोर से हंसा. तब John Colhm ने उससे कहा, “क्या तुम मेरी इस बात पर यकीन नहीं कर सकते? Trust Me यदि मुझे यह भरोसा नहीं होता कि तीन साल के अन्दर ही Capital कि ओर से Congress में निर्वाचित (Elected) हो जाऊंगा तो मैं इस College में Admission ही नहीं लेता.” Future में महान बनने वाले व्यक्ति ऐसे शब्द अपनी शक्तियों और अपने Self-Confidence के आधार पर कह जाते हैं. ऐसे व्यक्ति अपनी Ability के मूल्य को समझते हैं और उसी के अनुसार आत्मविश्वास रखना जानते हैं. William Shakespeare ने एक जगह लिखा है, “जो पराश्रित और Hesitation करने वाले व्यक्ति हैं वे आत्मनिर्भर रहने वालों के उदार Ego को नहीं समझ सकते. आत्मनिर्भर व्यक्ति को यह खुशी होती है कि उसमे राजमुकुट (Crown) प्राप्त करने की Power है.

Self-Confidence और आत्मनिर्भता कि जब Collaboration हो जाती है तो व्यक्ति Life के प्रत्येक मोर्चे पर Success ही अर्जित नहीं करता बल्कि अपने Self-Respect और गौरव को भी Harmful होने से बचाता है. देश कि आजादी के लिए संघर्ष करते हुए Mahatma Gandhi ने भी इसी प्रकार का Message दिया था कि यदि देश के सभी लोग Self-dependent हो जाएँगे तो उनका आत्मविश्वास बढेगा और उन्हें Struggle करते हुए आगे बढ़ने में कोई भी भय (Fear) प्रतीत नहीं होगा.

जो लोग Self-dependent नहीं होते हैं, वह उस पतले सरकंडे के समान होते हैं जो हवा के मामूली झोंके पर ही लचक उठता है. आप Self-Confidence रखते हुए Self-dependent हो जाएँ, तो अन्य सभी नेमतें उसके पीछे स्वतः ही चली आएँगी. याद रखें कि आप Self-dependent नहीं हैं तो आपकी Countless Abilities भी किसी काम की नहीं रहेंगी और आप लोगों के लिए एक Unsuccessful और नाकारा व्यक्तियों की List में ही तुम्हारी Counting होंगी. निम्नलिखित Hindi Motivational Story से आप समझ सकते हैं कि मनुष्य अपने Self-Confidence को बनाए रखकर क्या कुछ नहीं कर सकता:

एक सेठ के दुकान के Storeroom में आग लग गई. सेठ के सभी नौकर, सैकड़ों नगर-मोहल्ले वासी आग बुझाने में Unsuccessful रहे और सारी कमाई हुई Properties Destroy हो गई. सब कुछ जल जाने के बाद लोगों ने सेठ के पास जाकर दुःख प्रकट किया और सांत्वना (Consolation) दी, “आपकी विपत्ति (Adversity) से हम दुखी हैं. आपकी Whole-Life कि कमाई पलभर में Destroy हो गई.” सेठ मुस्कुराए, ऑंखें बंद करके उपरवाले का स्मरण किया. उन्होंने लोगों से कहा कि, “यह जो खो गया, वह फिर देगा, कृपा करेगा. जरुर मुझसे अनजाने में कोई Mistake हो गई होगी तभी यह Accident हुई. वह सब मेरे Life की असली कमाई नहीं थी. असली कमाई तो वह है जो मेरे पास है और उसी के बल से मैं पुनः सबकुछ अर्जित कर लूँगा. इस Properties के Destroy होने से जब मुझे ही कोई दुःख नहीं है तो फिर आपलोग क्यों दुखी हैं? सभी सेठ को आश्चर्य भरी नजरों से देखते रह गए. उनकी आँखों में एक ही प्रश्न था, “सेठ, क्या है आपकी असली कमाई जिस पर आप शांत हैं, अविचलित हैं और अपने आपको Encourage किए हुए हैं.” “मेरी असली कमाई है उपरवाले में Faith (Loyalty) और अपने Struggle करने पर Confidence है. आग में यह सब तो नहीं जला न और यह विपत्ति में भी मैं यह बात नहीं भूला सकता हूँ, जिससे मैंने कमाई की थी और आगे भी करूँगा. मैं विनय नहीं छोडूंगा नहीं तो लोगों की सहानुभूति (Sympathy), Support एवम् Guidance नहीं मिलेगी. अंतः विपत्ति के समय मनुष्य को Patience नहीं छोड़ना चाहिए और इसी के बल पर कोई Lost Property ही नहीं सब कुछ प्राप्त कर सकता है.”




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Friday, 25 December 2015

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Effective Time Utilization सदुपयोगी समय in Hindi

खोया हुआ वक्त जहाँ पछतावे के सिवा कुछ नहीं देता है, वहीँ वक्त का किया गया Utilization अनेक अवसर आपको प्रदान करता है. यदि Childhood में आपने समय का सही उपयोग Education प्राप्त करने में किया होता है तो Adolescence (Teenage) में आपके उज्जवल Career के कई रास्ते पैदा हो जाते है. Teenage में भी Time को Utilization कर लिया जाए तो फिर Lifetime के लिए आप सुखी रह सकते हैं. नीचे लिखे Motivational Story का अवलोकन निश्चित ही आपकी प्रेरणा बनेगी:

किसी महापुरुष ने कहा है कि, जिस प्रकार Gold का प्रत्येक कण मूल्यवान (Precious) होता है उसी प्रकार समय का प्रत्येक क्षण भी Valuable होता है, इसलिए Time का Utilization समय को बचाने के सामान है. जो इसे बचाता है और इसका सदुपयोग करता है Success अपने आप उसके कदम चूमती है. Dr. Bhim Rao Ambedkar, London में अपनी Study कर रहे थे. London में उनके Classmate Asnadekar थे और वे दोनों एक ही Room में रहते थे. हर समय पढाई-लिखाई (Studies) में डूबे रहने वाले डॉ. भीमराव आंबेडकर को देखकर Asnadekar बहुत हैरान रहते थे. एक दिन आधी रात को अचानक उनकी नींद टूट गई. उन्होंने देखा कि बत्ती जाल रही है और Dr. Bhim Rao Ambedkar, Study में लगे हुए हैं. उन्होंने पूछा, “आप और कितनी देर पढेंगे? बहुत Time हो गया है, अब सो जाइए.” Dr. Bhim Rao Ambedkar ने Serious Voice में Answer दिया, “Asnadekar साहब मेरे पास खाने के लिए पैसा और सोने के लिए समय है कहाँ? मुझे तो एक-एक क्षण का Utilization करना है. मैं इसे नष्ट करने कि स्थिति में हूँ ही नहीं.” यह कहकर वे पढाई में फिर से तल्लीन (Engrossed) हो गए.

प्रत्येक महापुरुष का Life यही बताता है कि उसने Time का कभी भी निरादर (Disgrace) नहीं किया. यही कारण है कि उन्होंने Life में यश (Fame) औए सफलताएँ (Successes) अर्जित कीं. निरंतर कर्म (Continuous Work) करते रहें और प्रयासों को High Quality का भी बनाते रहें. Starting में आप Failure हो सकते हैं लेकिन अंततः आप Success अवश्य होंगे और समय के साथ किया गया आपका Justice आपके ही हक में प्रत्येक Decision को Protect करेगा.



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Debate Against Media In Hindi

Western Electronic Kingdom ने विस्मयकारी (Amazing) पहुँच प्राप्त कर ली है. Globalization ने इसे विचारधारा के मंच पर ज़ोर दिखाने के लिए बहुत सी मांसपेशियां उपलब्ध करा दी हैं. इसने Satellite और Cable तकनीक से Accelerated International पहुँच प्राप्त कर ली है. पशि्चमी और विशेष रूप से Anglo-American Media ने World Online सेवाओं, Radio और Newspaper और Magazines पर प्रभुत्व प्राप्त कर लिया है. Western Electronic साम्राज्यों के विस्तार के साथ Western Media ने Satellite और Cable तकनीक द्वारा International Market प्राप्त कर ली है.

International Television News का बड़ा भाग Western News संगठनों के द्वारा फैलाया जाता है. इसमें Television News Agency जैसे Right Television, The World Wide Television News और A.P.T.V तथा Satellite और Cable आधारित संगठन जैसे CNN., SKY और B.B.C. World सेवा, इन दोनों प्रकार कि सेवाएँ अपनी विभिन्न Languages पर आधारित सेवाओं के साथ विश्व वायु तरंगों पर छायी हुई हैं.

World की चार News Agency: Associated Press, United Press International, Writers और Agency France Press में से पहली तीन American और British agencies हैं और उनमें चारों World News का लगभग 80% उपलब्ध कराती हैं. Worldwide Employees का जाल रखने के बावजूद ये कंपनियां जानबूझ या अनजाने में, पशि्चमी और विशेष रूप से American और British News एजेंडा रखती है.

इसके अतिरिक्त, India के English Language के सभी बड़े Newspaper और समाचार पत्रिकाएँ Syndicate व्यवस्था का लाभ उठाकर लगातार गर्वपूर्वक पशि्चमी समाचार पत्रों और पत्रिकाओं से टिप्पणियाँ और Feature छापते रहते हैं. इस प्रकार Western News Organization पशि्चमी हितों को ध्यान में रखते हुए International News एजेंडा तय करने और उन्हें आयोजित करने में बहुत प्रभावकारी होते हैं. यहाँ तक कि स्थानीय समाचार पत्रों को भी बड़े समाचार बाँटने वालों द्वारा अनुवाद की हुई सामग्री पर भरोसा करना होता है और इस तरह वह घरेलू समाचार के उपभोगताओं तक अपना प्रभाव फैला देते हैं. ऐसा केवल India में ही नहीं हो रहा है. पुरे Developing World को वही सब कुछ देखना पड़ता है जो प्रभुत्वशाली पशि्चम दिखाना चाहता है.

बहुत से Indian Newspaper पशि्चमी मुहावरों, उनकी भाषा, समाचार और मूल्यों को अपनाते हैं और उनकी Copy करते हैं.

इस्लामी आतंकवाद (Islamic Terrorism) कि शब्दावली Western News Media ने गढ़ी है. पशि्चमी हितों के प्रति झुकाव रखने के कारण Indian Media में इसकी गूंज सुनायी पड़ती है. हालाँकि केवल यह कह देना कि इस्लाम Terrorism का न तो प्रचार करता है न बढ़ावा देता है, इसे रोकने के लिए पर्याप्त नहीं. कुछ Terrorist अवश्य Islam के पर्दे में शरण लेते हैं और America की ओर झुकाव रखने वाली Media के लिए एक बहाना उपलब्ध कराते हैं ताकि जिहाद (Jihad) को Terrorism का समानार्थी (Synonyms) बताया जा सके.

फिलिस्तीनी (Palestine) क्षेत्रों पर इस्राइल (Israel) का कब्ज़ा और इस्राइल द्वारा संयुक्त राष्ट्र (United State) के प्रस्तावों का लगातार उल्लंघन और America द्वारा मध्य पूर्व में ऊर्जा के स्रोतों पर अधिकार प्राप्त करने के लिए खुनी खेल कुछ समूहों को हथियार (Weapon) उठाने के लिए प्रेरित करता है. मध्य-पूर्व में होने वाली घटनाओं का समाचार लिखने में Western News Media दोहरे मानदंड अपनाते हैं. इस्राइल द्वारा फिलिस्तीनी क्षेत्रों के कब्जे की अनदेखी की जाती है जबकि फिलिस्तीनी मुसलमानों द्वारा इस हमले का विरोध करना Islamic Terrorism बतलाया जाता है. यह कहने की आवश्यकता नहीं कि विभन्न कौमों द्वारा किए गए अपराधों के बारे में निर्णय करने के लिए समाचार माध्यमों के स्वामी अलग मानदंड रखते हैं.

ये सभी चीजें Islam और Muslim के साथ का शब्द जोड़ने में विशेष हितों कि ओर इशारा करते हैं. आतंकवाद और आतंकवादियों के मामले में इतना अधिक दोहरा मानदंड अपनाने के पीछे कोई न कोई षड्यंत्र अवश्य होगा क्योंकि सिर्फ इस्लाम और मुसलमानों को ही ऐसे Activities को इस्लाम से जोड़ने की आवश्यकता नहीं है जिस प्रकार Sri Lanka के Hindu Terrorists के Activities के लिए हिन्दुओं को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. लेकिन Media का यह असंतुलन विकसित Western Countries को कुछ ऐसे लोगों पर Terrorist का आरोप लगाने का अधिकार दे देता है जिनके पास Media नहीं है.

Salman Rushdi ने Islam को अपमानित करने का जो प्रयास किया है उससे मुसलमानों को दुःख होता हो लेकिन Western News Media के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बहाने सलमान रुश्दी का बचाव करना आवश्यक है. Western Countries सलमान रुश्दी का बचाव करते हैं, लेकिन Holocaust का इंकार करने पर David Irwin को जेल भेज देते हैं. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की यह कैसी विडंबना है. United States Of America के अन्दर इस्राइल और उनकी नीतियों कि आलोचना करना लगभग असंभव है. इस तरह के प्रयास करने वाले सभी लोगों के विरुद्ध सामवाद Anti Law के अंतर्गत मुकद्दमा चलाया जाता है. इससे एक बात स्पष्ट है कि Western Countries और Western News Media को भी कुछ विश्वासों कि हर कीमत पर रक्षा करनी होती है.


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Thursday, 24 December 2015

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Happy in Sadness in Hindi Motivatinal Story

Remember that की दुनियाँ Smiling Person के साथ Smile तो कर सकती है But रोते हुए (Crying) Person के साथ रो नहीं सकती है. Smile से भरा Face सबको पसंद आता है. आपकी Smile से Problems के कई “Close Door” Open हो सकते हैं. रोती हुई Face रख कर कर आप किसी को भी Impress नहीं कर सकते हैं. बेशक Life में हजार गम हैं, हजार Problems हैं, लेकिन उनका Face - Off Happiness के साथ भी किया जा सकता है. समाजिक बात-चीत करते समय Smile भरे चेहरे को बहुमूल्य ही समझें. आपके Life में भी ऐसे Smiling Face होंगे, जिनसे मिलते ही आप खिल उठते होंगे. यही होता है हँसमुख व्यक्ति का कमाल. यदि आप संतोष (Satisfaction) के धन को पा लेते हैं, तो आप भी Always Happy रह सकते हैं. निचे लिखी Motivational Story भी यही सन्देश प्रदान करती है:

बहुत समय पहले कि बात है. किसी राज्य में चित्रसेन नाम के राजा थे. राजा चित्रसेन योग्य (Eligible) और गुनी व्यक्तियों का Respect करते थे, पर वे बगैर किसी Reason के ही क्रोधित (Angry) भी हो उठते थे और फिर उन्हें कुछ भी नहीं सूझता था, जो मन में आता वही करते. एक दिन वे किसी गहरी सोच में व्यस्त थे. उन्होंने देखा कि ऐसे दुविधाओं में भी प्रधानमंत्री (Prime Minister) जयभद्र Smile कर रहे थे. उन्होंने Indirectly इसके लिए Alert भी किया, पर जयभद्र के होठों से वह मुस्कान तब भी लुप्त न हो सकी. चित्रसेन के चाटुकार (Spaniel) और जयभद्र के विरोधी दरबारियों के हाथ यह एक अच्छा अवसर लग गया. उन्होंने राजा से कहा , “महाराज जयभद्र को आपने बहुत सिर चढ़ा लिया है. अब उन्हें अपनी Limit का भी कोई ध्यान नहीं है.” चित्रसेन अपने स्वभाव से Helpless थे, उन्होंने जयभद्र को Punished करने के लिए उन्हें Prime Minister Post से हटा कर एक Junior Minister बना दिया. जयभद्र अगले दिन दरबार में आकर Junior Minister की Chair पर बैठ गए. किन्तु चित्रसेन की आशा के विपरीत उस Time भी उनके होठों पर वही मुस्कान दिखाई दे रही थी. चित्रसेन चाटुकारों कि बात सही लगी. उन्होंने उसी समय उन्हें Junior Minister Post से भी हटाकर एक Departmental Officer बनाए जाने का फरमान जारी कर दिया. किन्तु चित्रसेन ने फिर भी जयभद्र के होठों पर वही मुस्कान देखी.

राजा चित्रसेन ने जयभद्र से पूछा तो उन्होंने कहा, “राजन, Respect को मैंने कभी अपना अधिकार नहीं माना. सुख और दुःख को मैं समभाव (Same) रूप से देखता हूँ. आपने मुझे जो Post दिया था वह Public Service के लिए था, उसे मैंने कभी भी अपना नहीं समझा, फिर उसके रहने नहीं रहने से क्या फर्क पड़ता है. मैं तो अपनी नमक-रोटी से Satisfied हूँ. वह मुझे आपकी कृपा (Mercy) से आज भी मुझे मिल रही है, फिर भला मैं क्यों न मुस्कराऊं?” चित्रसेन ने जयभद्र को अपने सिने से लगा लिया और बोले, “जयभद्र मैं Angry Man अवश्य हूँ, पर इतना मुर्ख नहीं हूँ कि चाटुकारों की बातों में आ जाऊं. मैंने जो कुछ भी किया अपनी आँखे खोलने के लिए किया.” जयभद्र को पुनः Prime Minister Post पर सुशोभित कर दिया गया.

लेकिन यह अवश्य है कि दुसरे के दुःख में आप नहीं मुस्करा सकते हैं और तब आपको सांत्वना ही देनी होती है. मुस्कान भरे चेहरे वाले जब तसल्ली देते हैं तो सभी लोग रहत भी महसूस करते हैं. 


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