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Monday, 16 May 2016

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सही लक्ष्य साधिए: Target

Target
आज मैं आपलोगों के सामने ऐसी बात रखने जा रहा हूँ जो कि जीवन में इस बात को लेकर बहुत सारी दुविधाएँ होती है कि – अपना लक्ष्य कैसे चुने. कभी भी बड़ा आदमी बनने के लिए बड़ा सोच रखना जरुरी है और साथ ही साथ उस लक्ष्य को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत कि आवश्यकता होती है. अगर आपकी सोच बड़ी है पर आपकी मेहनत आपके सोच के मुवाफ़िक़ काम है तो आप को सफलता नहीं मिल सकती.

सही लक्ष्य साधिए:

एक Doctor वर्षों Struggle करने के बाद कार-बंगला भी रखता है, सुसज्जित माकन में रहता है, अच्छे वस्त्र पहनता है. बड़े-बड़े आदमी उसके यहाँ आते हैं, उसका वैभव (Glory) हर बात से प्रकट होता है. उसकी तड़क-भडक देखते ही College से निकले हुए एक नए युवक को प्रलोभन होता है कि यदि व्यवसाय है तो डॉक्टर का ही है. दुसरे दिन मोटर कार में घूमते हुए वह Engineer को देखता है, तब उसको विचार होता है कि यदि पेशा अच्छा है तो Engineering का है. उसको सफल प्रयत्न करने वाले नित नए मनुष्य दिखाई देते हैं और उसको नित नई कमाना सताती है. वह असमंजस में पड़ जाता है कि यह पेशा अच्छा है या वह पेशा. उसको इस लुभावनी तड़क-भड़क पर मोहित होने से पहले यह विचार कर लेना चाहिए कि डॉक्टर साहब या इंजिनियर साहब ने उस तड़क-भड़क, मान-मर्यादा को वर्षों कठिनाइयाँ झेलकर प्राप्त किया है. अपने पेशे में सफल होने के लिए उनको न जाने कितने कष्ट उठाने पड़े होंगे; वे एक ही दिन में समृद्धि (Prosperity) को प्राप्त नहीं हो गए थे.

लक्ष्य किस प्रकार बनाया जाए, यह एक विचारणीय बात है. प्रश्न यह है कि कौन सा पेशा स्वीकृत किया जाए? अपने बड़े-बूढों की सम्मति से या अपने अंतः करण की प्रेरणा से या मित्रों के कहने से या अपनी प्राकृतिक जन्मस्थिति से अपना Target या Goal बनाना चाहिए? इस प्रश्न का यथार्थ उत्तर देना अत्यंत कठिन है. मेरा मानना है कि सर्वप्रथम अपनी प्राकृतिक जन्मस्थिति को देखते हुए ही अपना लक्ष्य बनाना चाहिए; क्योंकि व्यवसाय की तुच्छता कोई वस्तु नहीं है. एक झाड़ू देने वाला जमादार भी खुश व सुखी हो सकता है, जबकि एक राजकुमार (Prince) वैभव और ऐश्वर्य से घिरा हुआ होता है, वह राजमहल (Palace) में हो रहे अवसरों से पूरा लाभ उठाने के बा-वजूद भी उसे दुःख का अनुभव हो सकता है.

जन्मस्थिति के अतिरिक्त लक्ष्य बनाने में अनुभव भी हमारा सहायक हो जाता है. अंतः करण की पुकार हमें सही मार्ग सही पर ला देती है, परन्तु संलग्नता और एकाग्रता के बिना हमें किसी भी मार्ग पर, किसी भी व्यवसाय में सफलता प्राप्त नहीं हो सकती है.

जीवन में सफलता की कामना करने वाले व्यक्ति को चाहिए कि वे संलग्नता और एकाग्रता की विचित्र शक्तियों को अपने आप में विकसित करें, ठीक उसी तरह जैसे- किसान अपनी फसल की और सांप अपने मणि कि हिफाजत करता है.

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Saturday, 6 February 2016

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Positive Thinking Can Change Your “Life” अच्छी सोंच _जो_ बदल दे आपकी जिंदगी...


Positive Thinking Can Change Your “Life”

अच्छी सोंच जो_ बदल दे आपकी जिंदगी...!!!  
 
मैं यह कहता हूँ कि जो आपको स्वयं के लिए पसंद नहीं वह Behavior दूसरों के साथ भी न करें. बच्चा जब बोलना सिख जाता है, तो यह मान लेना चाहिए कि उसने व्यहवार करना Start कर दिया है. लेकिन उसे Public Behavior की पहली शिक्षा कहाँ से प्राप्त होगी? जाहिर है कि आपका बच्चा Social Behavior के लिए अपने घर को ही School के रूप में चुनने वाला है. अतः बच्चा जब बोलना सिख जाता है तो चीजों को समझने भी लगता है. 
 
प्रत्येक बच्चा अनुकरण (Emulation) करता है या Repeat करता है. यदि आपके घर का माहौल Friendly Social Behavior का Example है तो आपके घर का बच्चा भी उसी को दोहराएगा. लेकिन Unfortunately ऐसा नहीं है तो फिर बच्चे के Behavior में विसंगति उत्पन होना आरम्भ हो जाती है. Public Behavior की पहली पाठशाला आपका घर है. इस प्रथम सिद्धांत का ध्यान आप रखें तो यह सिद्धांत आपके बच्चों के संस्कारित लोक व्यहवार का ध्यान रखेगा.
 

Positive Thinking Can Change Your “Life” Hindi Story:

मैं एक बच्चे से सम्बंधित एक Interesting संस्मरण यहाँ देना चाहूँगा. तब उसकी उम्र महज ग्यारह साल थी. उसका Birthday गुजरे एक सप्ताह ही हुआ था. उसके पिता एक शाम घर का खर्च का Calculation कर रहे थे. उसकी माँ ने कहा कि रोहन (पुत्र) के Birthday के खाते में एक हज़ार रूपया और लिख लीजिये. रोहन के पिता चौक गये क्योंकि Birthday में हुए खर्च का हिसाब वो लिख चुके थे. तब उसकी पत्नी से जानकारी मिली कि रोहन ने अपने Birthday पर Cricket Club के बच्चों को हज़ार रूपये की Party अलग से दे दी थी. हमारे दुकानदार के Bill में ही वह राशि लिखी हुई थी. सारा Matter समझ कर रोहन के पिता मुस्कुरा उठे. उसकी पत्नी जो ध्यान में उसके चेहरे को देख रही थी, वह उस मुस्कान पर चौक गई. उसने रोहन के पिता से सवाल किया कि क्या आप रोहन के इस हरकत से Angry नहीं हैं? सवाल वाजिब था. लेकिन वो बिल्कुल भी नाराज़ नहीं थे. 
 
फिर उसने रोहन की माँ को बताया कि इन्सान अपनी संतान के Birthday पर स्वयं ख़ुशी मनाता है. अब यदि वही संतान अपने Birthday की ख़ुशी खुद मनाए तो क्या खर्च की चिंता के कारण नाराजगी (Unhappiness) व्यक्त करना उचित होगा? 
 
क्या आप बच्चे की ख़ुशी में ख़ुशी अनुभव करते हैं? क्या आप बच्चे की खुशी को स्वयं Control करना चाहते हैं? क्या यह बेहतर नहीं होगा कि बच्चे के Birthday पर बच्चे से ही पूछा जाए कि वह अपना Birthday किस तरह से मनाना चाहता है? इस तरह हम बच्चों को चयन करने का Authority (Power) देते हैं. उसे निर्णय करने की Freedom देते हैं. इस प्रकार आप अपने बच्चे की ख़ुशी में खुश होते हैं, यह फैसला आप स्वयं कर सकते है. 
 
अपने प्रियजनों को अपनी ख़ुशी में शरीक करने से ज्यादा अच्छा है कि आप प्रियजनों की ख़ुशी में सम्मिलित होने का अंदाज़ सीखें. अंतः यह जीवन की छोटी-छोटी Events ही हैं, जो हमें बतलाती हैं कि हमारा Behavior कैसा होना चाहिए. वह आदमी अपने बच्चे द्वारा किए गए खर्च को फिजूलखर्ची (Extravagance) करार देकर नाराज़ भी हो सकता था. लेकिन क्या ऐसा करना उचित होता? यदि उसके बेटे ने अपनी मर्ज़ी से अपनी खुशी के लिए कुछ खर्च किया था तो क्या उसे अपने बेटे की ख़ुशी का ख्याल नहीं रखना चाहिए था? ज्यादातर मामलों में माता-पिता चाहते हैं कि बच्चे उनकी ख़ुशी की पूर्ति करें. लेकिन क्या बच्चों की ख़ुशी के अनुसार माता-पिता नहीं चल सकते हैं? 
 
आज के युग में अभिभावक यह समझते हैं कि, “बच्चों को अपना हित-अहित मालूम नहीं है और इसी कारण उनके Future Related Decision भी अभिभावकों ख़ुद ही कर लेते हैं.” एक Doctor चाहता है कि उसका बेटा उसी की भातिं Doctor बने. यदि कोई Doctor अपने Profession में संतुष्ट नहीं है तो वह चाहता है कि उसका बेटा Doctor नहीं बने. लेकिन हम अपने ही बच्चे की Natural Talent के सम्बन्ध में कोई विचार नहीं करते हैं.
 
इस प्रकार हम अपने ही बच्चे के साथ न्याय नहीं कर पाते हैं. हम सपना यही देखते हैं कि शिक्षा का उद्देश्य प्रमुख रूप से धन कमाना होना चाहिए. फिर चाहे उस शिक्षा में बच्चों की रूचि हो या न हो. यहाँ आवश्यक हो जाता है कि हम अपने Behavior को सुधारें और अपने बच्चों को यह आज़ादी दें कि वह अपने Career के सम्बन्ध में अपने Guardian के साथ चर्चा कर सकें. जब तक हम Public Behavior के Rules को घर में लागू नहीं कर सकते, उन्हें दुनिया पर लागू करना भी बेमानी ही होगी…!!!
 
 

आपको

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Tuesday, 29 December 2015

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The key of Success - Positive Thinking सकारात्मक सोंच In Hindi Motivational Story

Unsuccessful को Success बनाने में Positive Thinking का महत्व ही सबसे ज्यादा होता है. आज लोगों के दिमाग में यह Negative Thinking घर कर जाती है की Success को पाना बहुत ही मुस्किल काम है
लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है अगर आप Positive Thinking के साथ कड़ी मेहनत करें तो Success को पाना बिल्कुल ही आसन हो जायेगा और इतना ही नहीं Success आपके कदम चूमेगी. “यह बिल्कुल भी Important नहीं है कि कल आप क्या थे अथवा आज आप क्या हैं और किस Stage पर हैं. सबसे Important यह है कि आप कल के लिए क्या सोचते हैं और कल क्या बनना चाहते हैं.”

आज के दौर में जहाँ Youngsters के सामने Jobs की Problem Monster का रूप धारण किए हुए खड़ी है, वहां उनका जल्दी ही Disappointed हो जाना तथा उचित Job न मिलने पर Frustration से भर जाना सामान्य सी बातें हैं. इस स्थिति से Self-Confidence, स्वप्रेरणा, Struggle करने की क्षमता, जल्दी Decision लेने की Ability तथा Situations के हिसाब से खुद को ढालने की कला ही छुटकारा दिला सकती हैं, ये गुण छोटे या मामूली Realized हो सकते हैं, परन्तु लोगों को प्रायः यह अहसास नहीं हो पाता है कि उनमें ये गुण कितनी क्षमता (Efficiency) के साथ Present हैं. यदि हम Struggle Efficiency की बात करें तो ऐसे हजारों उदाहरण दिख जाएँगे, जब किसी व्यक्ति ने अत्यंत छोटे स्तर से काम शुरु करके Unlimited Heights हासिल कीं. हर प्राणी में विषम Situations से जूझने की अदम्य Power होती है. जरुरत है खुद को पहचानने की और Life में संघर्ष से भागने के बजाय Positive Thinking पैदा करने की. यदि व्यक्ति अपने जीवन के हर मोड़ पर Positive Thinking रखे तो पता चलेगा कि उसकी आधी से ज्यादा Problems तो खुद-ब-खुद Solved हो गई.

आशंकाओं के साथ किया हुआ कोई भी काम Success नहीं होता, जबकि Good Thinking के साथ किया गया कोई भी प्रयास कभी भी Unsuccessful नहीं होता. World में दो ही प्रकार के लोग हैं, एक वह जो Successful हैं और दुसरे वह जो Unsuccessful हैं. लेकिन आपको यह सोचना चाहिए कि कुछ व्यक्ति Unsuccessful क्यों होते हैं और कुछ लोग Always Successful कैसे हो जाते हैं? इसके पीछे प्रमुख कारण होता है व्यक्ति का नजरिया. काम और जीवन के प्रति व्यक्ति का दृष्टिकोण उसके आगे बढ़ने या पीछे हटने में Effective Role निभाता है. आप किसी काम में कितने भी निपूर्ण क्यों न ह्नों, आपकी योग्यता चाहे जो हो और आपकी रूचि रुझान कुछ भी हो, जो चीज आपकी Success सुनिश्चित करती है, वह है आपका Attitude.

लेकिन हम में से कितने लोग अपने काम को उत्साहपूर्वक कर पाते हैं? बहुत काम. फिर भी हम कहते हैं कि फलां Interview में नहीं चुने गए या Promotion नहीं पा सके. हारने से जीत मिलती हो ऐसा तो नहीं है फिर भी कुछ खोकर कुछ तो प्राप्त किया जा सकता है, यह बात विरोधाभासी लग सकती है, लेकिन है नहीं. हम मनुष्य हैं और थोड़ी बहुत असफलता मिलना आम बात है. कोई भी व्यक्ति अपने सारे कामों में 100% Success नहीं पा सकता.

जीवन में कभी न कभी हर कोई Unsuccessful होता है. दूसरे शब्दों में असफलताओं के Pillars पर ही टिकी होती है Success. विजेता हार-जीत के अपने अनुभावों को Analysis करके अपने लिए Success होने का Formula खोज लेतें हैं. इसके अनुरूप ही वे अपने Behavior और कार्य में सुधर ला पाते हैं. फर्क सिर्फ यह होता है कि एक Winner जब कोई Mistake करता है तो उसे Accept कर लेता है कि हाँ मुझसे गलती हुई और एक Unsuccessful Person कहता है कि यह मेरी गलती नहीं थी.



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