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Monday, 16 May 2016

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सही लक्ष्य साधिए: Target

Target
आज मैं आपलोगों के सामने ऐसी बात रखने जा रहा हूँ जो कि जीवन में इस बात को लेकर बहुत सारी दुविधाएँ होती है कि – अपना लक्ष्य कैसे चुने. कभी भी बड़ा आदमी बनने के लिए बड़ा सोच रखना जरुरी है और साथ ही साथ उस लक्ष्य को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत कि आवश्यकता होती है. अगर आपकी सोच बड़ी है पर आपकी मेहनत आपके सोच के मुवाफ़िक़ काम है तो आप को सफलता नहीं मिल सकती.

सही लक्ष्य साधिए:

एक Doctor वर्षों Struggle करने के बाद कार-बंगला भी रखता है, सुसज्जित माकन में रहता है, अच्छे वस्त्र पहनता है. बड़े-बड़े आदमी उसके यहाँ आते हैं, उसका वैभव (Glory) हर बात से प्रकट होता है. उसकी तड़क-भडक देखते ही College से निकले हुए एक नए युवक को प्रलोभन होता है कि यदि व्यवसाय है तो डॉक्टर का ही है. दुसरे दिन मोटर कार में घूमते हुए वह Engineer को देखता है, तब उसको विचार होता है कि यदि पेशा अच्छा है तो Engineering का है. उसको सफल प्रयत्न करने वाले नित नए मनुष्य दिखाई देते हैं और उसको नित नई कमाना सताती है. वह असमंजस में पड़ जाता है कि यह पेशा अच्छा है या वह पेशा. उसको इस लुभावनी तड़क-भड़क पर मोहित होने से पहले यह विचार कर लेना चाहिए कि डॉक्टर साहब या इंजिनियर साहब ने उस तड़क-भड़क, मान-मर्यादा को वर्षों कठिनाइयाँ झेलकर प्राप्त किया है. अपने पेशे में सफल होने के लिए उनको न जाने कितने कष्ट उठाने पड़े होंगे; वे एक ही दिन में समृद्धि (Prosperity) को प्राप्त नहीं हो गए थे.

लक्ष्य किस प्रकार बनाया जाए, यह एक विचारणीय बात है. प्रश्न यह है कि कौन सा पेशा स्वीकृत किया जाए? अपने बड़े-बूढों की सम्मति से या अपने अंतः करण की प्रेरणा से या मित्रों के कहने से या अपनी प्राकृतिक जन्मस्थिति से अपना Target या Goal बनाना चाहिए? इस प्रश्न का यथार्थ उत्तर देना अत्यंत कठिन है. मेरा मानना है कि सर्वप्रथम अपनी प्राकृतिक जन्मस्थिति को देखते हुए ही अपना लक्ष्य बनाना चाहिए; क्योंकि व्यवसाय की तुच्छता कोई वस्तु नहीं है. एक झाड़ू देने वाला जमादार भी खुश व सुखी हो सकता है, जबकि एक राजकुमार (Prince) वैभव और ऐश्वर्य से घिरा हुआ होता है, वह राजमहल (Palace) में हो रहे अवसरों से पूरा लाभ उठाने के बा-वजूद भी उसे दुःख का अनुभव हो सकता है.

जन्मस्थिति के अतिरिक्त लक्ष्य बनाने में अनुभव भी हमारा सहायक हो जाता है. अंतः करण की पुकार हमें सही मार्ग सही पर ला देती है, परन्तु संलग्नता और एकाग्रता के बिना हमें किसी भी मार्ग पर, किसी भी व्यवसाय में सफलता प्राप्त नहीं हो सकती है.

जीवन में सफलता की कामना करने वाले व्यक्ति को चाहिए कि वे संलग्नता और एकाग्रता की विचित्र शक्तियों को अपने आप में विकसित करें, ठीक उसी तरह जैसे- किसान अपनी फसल की और सांप अपने मणि कि हिफाजत करता है.

Note:

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Wednesday, 16 March 2016

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फर्श से अर्श तक… A Success Story of Google CEO Sundar Pichai in Hindi

Google CEO Sundar Pichai
मैंने इस Story का Title फर्श से अर्श तक इसलिए रखा है क्योंकि ये Story उनके बारे में है, जिन्होंने कड़ी मेहनत, लगन, परिश्रम और संघर्ष के साथ अपने जीवन की शुरुआत की और सफलता की सीढ़ी पर पहला कदम रखा. वे लगातार कड़ी मेहनत करते रहे और Success के मुकाम तक पहुँच गए.
 
आज मैं आप लोगों के से ऐसी जानकारी Shear कर रहा हूँ जिन्हें बहुत से लोग शायद जानते हो लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें ये मालूम नहीं होगा कि दुनिया के मशहूर Search Engine GOOGLE के C.E.O. हमारे भारत देश में जन्मे और भारत के मूल निवासी जिनका नाम सुन्दर पिचाई है. तो चलिए जानते हैं Sundar Pichai के बारे में जिन्होंने सफलता के इस मुकाम को हासिल किया.
 

A Success Story of Google CEO Sundar Pichai in Hindi:

यह कहानी है फर्श पर सोने वाले युवा सुंदर की जो आज गूगल का C.E.O. बनकर अर्श पर हैं. सुंदर की कामयाबी की कहानी किसी परिकथा से कम नहीं. वर्ष 1972 में Chennai में जन्मे सुंदर के पिता British Company G.E.C. में Engineer थे. उनका परिवार दो कमरों के एक मकान में रहता था. उसमें सुंदर की Study के लिए कोई अलग Room नहीं था. इसलिए वे Drawing Room के फर्श पर अपने छोटे भाई के साथ सोते थे. घर में न तो Television था और न ही Car. इससे उनके परिवार की आर्थिक हैसियत का अनुमान लगाया जा सकता है. लेकिन इंजीनियर पिता ने बचपन में अपने बेटे के मन में तकनीक के बीज बो दिए. इसलिए तमाम अभाव भी सुंदर के आगे बढ़ने की राह में बाधा नहीं बन सके.
 
पिचई का प्रारंभ से ही पढाई में Talented थे. उन्हें Cricket में काफी रूचि थी और अपनी स्कूल के Cricket Team के Captain भी थे. एक Cricket Player के रूप में उन्होंने कई मैडल जीते, जिसे देखकर ही इनके मां-बाप को अंदाजा हो गया था कि आगे चलकर उनका बेटा परिवार का नाम रौशन करेगा.
 

Biography of Sundar Pichai: सुन्दर पिचाई की जीवनी


पूरा नाम पिचाई सुन्दरराजन / Pichai Sundararajan
जन्म 12th July 1972 Chennai, Tamil Nadu, India
पिता रघुनाथ पिचई
पत्नी अंजलि पिचाई / Anjali Pichai
Employer Google Inc.
Occupation CEO of Google

पिचाई सुंदरराजन, जिन्हें दुनियाँ सुन्दर पिचाई (Sundar Pichai) के नाम से जानती है, एक Senior Technology Executive हैं. भारत में जन्मे और Indian Institute of Technology, Kharagpur (IIT Kharagpur) से B. Tech. करने वाले Sundar Pichai ने 2004 में World की सबसे बड़ी Search engine company Google Join किया और अपनी कड़ी मेहनत और योग्यता के बल पर company के सबसे बड़े पद के लिए चुने गए और वर्तमान में Search engine company Google के C.E.O. (Chief Executive Officer) हैं. (10th August 2015 को GOOGLE के Chief Executive Officer के रूप में चुना गया.)
 
Sundar Pichai का जन्म 12 जुलाई 1972 में Tamil Nadu की राजधानी Chennai में एक तमिल परिवार में हुआ था. उनके पिता का नाम रघुनाथ पिचाई और माता का नाम लक्ष्मी है. Sundar का बचपन मद्रास के अशोक नगर में बीता. सुन्दर के पिता रघुनाथ पिचाई British Company “जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी” (G.E.C.) में Senior Electrical Engineer थे और Company के Electrical parts बनाने वाली एक इकाई का प्रबंधन देखते थे.
 

Education:

1. Sundar Pichai ने अशोक नगर स्थित जवाहर विद्यालय से कक्षा 10th तक की पढ़ाई की.

2. IIT Chennai में स्थित वना वाणी स्कूल से 12th की पढ़ाई की.
 
3. Sundar ने B. Tech. की पढ़ाई के लिए IIT Kharagpur में दाखिला लिया और Metallurgy Engineering में डिग्री हासिल की.
 
4. IIT Kharagpur में उनके प्राध्यापकों ने उन्हें Stanford University से Ph. D करने की सलाह दी पर सुन्दर ने M.S. और M.B.A. किया.
 
5. उन्होंने Stanford University से “Material Science and Engineering” में Master of Science किया और University of Pennsylvania के “Wharton School” से Management (M.B.A.) की शिक्षा ग्रहण की.
 

Google Careers:

Sundar Pichai ने 2004 में GOOGLE Join किया जहाँ उन्हें “Product Management” और ‘नई खोजों और नए विचारों’ से सम्बंधित कार्यों की Responsibility सौंपी गयी. इसके तहत उन्होंने Google Chrome, Chrome OS और Google Drive जैसे उत्पादों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसके साथ-साथ उन्होंने Google Maps और Gmail जैसे महत्वपूर्ण उत्पादों के Applications Development में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 19 नवम्बर 2009 में Sundar Pichai “Chrome OS” का प्रदर्शन किया और उसके बाद Chromebook को 2011 में जांच व् परिक्षण के लिए उतारा गया. जांच और परिक्षण के बाद सन 2012 में इसे ग्राहकों के लिए उतारा गया. मई 2010 में Sundar Pichai ने Google के नए Video Codec VP8 के Open Sourcing का एलान किया. Google के इस Video Codec ने एक नया Video format “WebM” प्रस्तुत किया.
 
मार्च 2013 में Android भी Sundar Pichai के अंतर्गत आने वाले उत्पादों में शामिल हो गया. इससे पहले Android का कार्य और विकास Andy Rubin के प्रबंधन में हो रहा था.
 
Sundar Pichai को गूगल का अगला C.E.O. (Chief Executive Officer) बनाने के निर्णय की जानकारी 10th August 2015 को दी गई. 24 October 2014 को Google के Co-founder “Larry Page” ने Sundar को उत्पाद प्रमुख बनाने की घोषणा की थी.
 

Note:

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Saturday, 6 February 2016

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Positive Thinking Can Change Your “Life” अच्छी सोंच _जो_ बदल दे आपकी जिंदगी...


Positive Thinking Can Change Your “Life”

अच्छी सोंच जो_ बदल दे आपकी जिंदगी...!!!  
 
मैं यह कहता हूँ कि जो आपको स्वयं के लिए पसंद नहीं वह Behavior दूसरों के साथ भी न करें. बच्चा जब बोलना सिख जाता है, तो यह मान लेना चाहिए कि उसने व्यहवार करना Start कर दिया है. लेकिन उसे Public Behavior की पहली शिक्षा कहाँ से प्राप्त होगी? जाहिर है कि आपका बच्चा Social Behavior के लिए अपने घर को ही School के रूप में चुनने वाला है. अतः बच्चा जब बोलना सिख जाता है तो चीजों को समझने भी लगता है. 
 
प्रत्येक बच्चा अनुकरण (Emulation) करता है या Repeat करता है. यदि आपके घर का माहौल Friendly Social Behavior का Example है तो आपके घर का बच्चा भी उसी को दोहराएगा. लेकिन Unfortunately ऐसा नहीं है तो फिर बच्चे के Behavior में विसंगति उत्पन होना आरम्भ हो जाती है. Public Behavior की पहली पाठशाला आपका घर है. इस प्रथम सिद्धांत का ध्यान आप रखें तो यह सिद्धांत आपके बच्चों के संस्कारित लोक व्यहवार का ध्यान रखेगा.
 

Positive Thinking Can Change Your “Life” Hindi Story:

मैं एक बच्चे से सम्बंधित एक Interesting संस्मरण यहाँ देना चाहूँगा. तब उसकी उम्र महज ग्यारह साल थी. उसका Birthday गुजरे एक सप्ताह ही हुआ था. उसके पिता एक शाम घर का खर्च का Calculation कर रहे थे. उसकी माँ ने कहा कि रोहन (पुत्र) के Birthday के खाते में एक हज़ार रूपया और लिख लीजिये. रोहन के पिता चौक गये क्योंकि Birthday में हुए खर्च का हिसाब वो लिख चुके थे. तब उसकी पत्नी से जानकारी मिली कि रोहन ने अपने Birthday पर Cricket Club के बच्चों को हज़ार रूपये की Party अलग से दे दी थी. हमारे दुकानदार के Bill में ही वह राशि लिखी हुई थी. सारा Matter समझ कर रोहन के पिता मुस्कुरा उठे. उसकी पत्नी जो ध्यान में उसके चेहरे को देख रही थी, वह उस मुस्कान पर चौक गई. उसने रोहन के पिता से सवाल किया कि क्या आप रोहन के इस हरकत से Angry नहीं हैं? सवाल वाजिब था. लेकिन वो बिल्कुल भी नाराज़ नहीं थे. 
 
फिर उसने रोहन की माँ को बताया कि इन्सान अपनी संतान के Birthday पर स्वयं ख़ुशी मनाता है. अब यदि वही संतान अपने Birthday की ख़ुशी खुद मनाए तो क्या खर्च की चिंता के कारण नाराजगी (Unhappiness) व्यक्त करना उचित होगा? 
 
क्या आप बच्चे की ख़ुशी में ख़ुशी अनुभव करते हैं? क्या आप बच्चे की खुशी को स्वयं Control करना चाहते हैं? क्या यह बेहतर नहीं होगा कि बच्चे के Birthday पर बच्चे से ही पूछा जाए कि वह अपना Birthday किस तरह से मनाना चाहता है? इस तरह हम बच्चों को चयन करने का Authority (Power) देते हैं. उसे निर्णय करने की Freedom देते हैं. इस प्रकार आप अपने बच्चे की ख़ुशी में खुश होते हैं, यह फैसला आप स्वयं कर सकते है. 
 
अपने प्रियजनों को अपनी ख़ुशी में शरीक करने से ज्यादा अच्छा है कि आप प्रियजनों की ख़ुशी में सम्मिलित होने का अंदाज़ सीखें. अंतः यह जीवन की छोटी-छोटी Events ही हैं, जो हमें बतलाती हैं कि हमारा Behavior कैसा होना चाहिए. वह आदमी अपने बच्चे द्वारा किए गए खर्च को फिजूलखर्ची (Extravagance) करार देकर नाराज़ भी हो सकता था. लेकिन क्या ऐसा करना उचित होता? यदि उसके बेटे ने अपनी मर्ज़ी से अपनी खुशी के लिए कुछ खर्च किया था तो क्या उसे अपने बेटे की ख़ुशी का ख्याल नहीं रखना चाहिए था? ज्यादातर मामलों में माता-पिता चाहते हैं कि बच्चे उनकी ख़ुशी की पूर्ति करें. लेकिन क्या बच्चों की ख़ुशी के अनुसार माता-पिता नहीं चल सकते हैं? 
 
आज के युग में अभिभावक यह समझते हैं कि, “बच्चों को अपना हित-अहित मालूम नहीं है और इसी कारण उनके Future Related Decision भी अभिभावकों ख़ुद ही कर लेते हैं.” एक Doctor चाहता है कि उसका बेटा उसी की भातिं Doctor बने. यदि कोई Doctor अपने Profession में संतुष्ट नहीं है तो वह चाहता है कि उसका बेटा Doctor नहीं बने. लेकिन हम अपने ही बच्चे की Natural Talent के सम्बन्ध में कोई विचार नहीं करते हैं.
 
इस प्रकार हम अपने ही बच्चे के साथ न्याय नहीं कर पाते हैं. हम सपना यही देखते हैं कि शिक्षा का उद्देश्य प्रमुख रूप से धन कमाना होना चाहिए. फिर चाहे उस शिक्षा में बच्चों की रूचि हो या न हो. यहाँ आवश्यक हो जाता है कि हम अपने Behavior को सुधारें और अपने बच्चों को यह आज़ादी दें कि वह अपने Career के सम्बन्ध में अपने Guardian के साथ चर्चा कर सकें. जब तक हम Public Behavior के Rules को घर में लागू नहीं कर सकते, उन्हें दुनिया पर लागू करना भी बेमानी ही होगी…!!!
 
 

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Tuesday, 2 February 2016

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Passion is Direct Way To Success : जुनून : सफलता का सीधा रास्ता...!!!

Passion is Direct Way To Success

Passion is Direct Way To Success:

आज के Young Generation में यह आम तौर पर यह देखा जाता है कि लोग Success होने का Shortcut ढूंढते है पर ऐसा कोई Shortcut है ही नहीं. अगर ऐसा होता तो आज लोग इतने बेरोजगार नहीं होते, सभी को कहीं न कहीं Success मिल ही जाती. 
                   
                   हम अक्सर सुनते हैं कि, “ Success होने के लिए कोई Shortcut नहीं होता, कड़ी मेहनत ही Success होने का राज़ है.” लेकिन, हमारी मेहनत हमारे Dreams पर निर्धारित करती है. मान लीजिए कि यदि कोई व्यक्ति Mumbai जा कर Film Actor बनना चाहे, तो उसे पहले यह समझना होगा कि देश भर से प्रतिदिन कम से कम Five Thousand लोग Mumbai Station पर Film Actor बनने का सपना ले कर उतरते हैं. उन हजारों में से गिने-चुने लोग ही Success हो पाते हैं. सफलता के भी कई आयाम हैं, कुछ आंशिक रूप से सफल हुए, तो कुछ लोग कुछ समय के लिए ही Success हो पाते हैं. तात्पर्य यह है कि इस क्षेत्र को चुनने पर “Risk Factor” काफी ज्यादा है. क्या आप उन हजारों में खुद को गिने-चुने लोगों में ला सकते हैं, जिनके लिए Success का दरवाजा खुल जाये??? 
                  यदि हाँ, तो आगे बढिए. लेकिन इसके लिए जो चीज चाहिए, वह है – “जुनून” आइये, इसे एक सच्ची कहानी से समझते हैं. इस Motivational Story में यह बतलाया गया है कि अगर कोई व्यक्ति Passion और लगन के साथ किसी काम में लग जाए तो उसे सफलता अवश्य ही मिलती है. यह एक True Story है, जो आपको Success होने की रह दिखलाता है.

Way To Success:

                 कई वर्ष पहले मेरठ में Cloth businessman की एक Family रहती थी. व्यापारी के बेटे को गाने-बजाने का शौकीन था. परिवार वाले चाहते थे कि वह प्रारंभिक Studies के बाद Family Business को संभाल ले. लेकिन, लड़के का मन Business में नहीं लगता था. वह अक्सर सोचता कि यदि ईश्वर ने मुझे सुप्रसिद्ध परिवार में जन्म दिया है, यदि मैं Family के Business में ही लग जाऊं, तो इसमें मेरी अपनी उपलब्धि क्या रही???
                    उसने निश्चय किया कि वह अपने दम पर अपनी पहचान बनायेगा. इसके लिए उसने Singer बनना ही Career चुन लिया. फिर उसने एक सच्चे गुरु की खोज की. कई गुरुओं के पास गया, लेकिन मन नहीं भरा. इस बीच Family को Business को लेकर Delhi जाना पड़ा. यहाँ भी Family का बहुत दबाव था कि लड़का Family Business में आ जाए, पर थक हारकर परिवार वालों ने उस लड़के को 2 Year का Ultimatum Time दिया. यदि इन दो सालों में कुछ नहीं कर पाये, तो Family Business में आना पड़ेगा. लड़का मन गया और एक मजबूत इरादे (Strong Wills) के साथ Mumbai की ओर निकल पड़ा. कई गीतकारों और संगीतकारों के पास गया. सबने कहा, आवाज़ तो अच्छी है पर नई आवाज़ के कारण Risk नहीं ले सकते. हालाँकि संगीतकार राम संपत ने लड़के को कहा, “Straggle (संघर्ष) करते रहो, Success अवश्य मिलेगी.” 
               वह जीवन बिताने और अपनी खर्च निकलने के लिए Hotels, Pub, Bar etc. में गाने लगा. शाम से देर रात तक होटलों में गाता और सुबह होते ही काम की तलाश में निकल पड़ता. तभी उसे पता चला कि संगीतकार राम संपत ने एक नामी Jewellery Company के Advertisement के जिंगल के लिए उस लड़के का नाम Offer किया. जिंगल के लिए पांच हज़ार रूपये मिलेंगे. पर शर्त यह भी थी कि अगर जिंगल पसंद नहीं आया तो एक पैसा नहीं मिलेगा. उस लड़के ने तुरंत हामी भर दी. Company को जिंगल बेहद ही पसंद आया. जब इसे Televisions में Broadcast किया गया, तो लाखों लोगों की Positive response आने लगी. Mumbai के एक फिल्म Producer ने उस लड़के को अपनी Film के गाने के लिए Signed किया. Producer की एक शर्त थी कि जब तक Film Release नहीं हो जाती, वह किसी और Film के लिए नहीं गायेगा. अभी Record चल रही थी, तभी उस लड़के को Superstar Shahrukh Khan की Company Dream Entertainment से Phone आया. Company उसे अपनी आगामी Film “चलते-चलते” के लिए Sign करना चाहती थी. वह Agreement के कारण मजबूर था. वह बेहद उदासीन हो कर बैठ गया और स्वयं को कोसने लगा. कुछ माह बाद, जब उस Producer की Film Release हुई, तो Film Flop हो गई, पर उस लड़के का गया हुआ गाना हर किसी के जुबान पर चढ़ गया. वह गाना था, “अल्ला के बन्दे” और उस लड़के का नाम था Kailash Kher.

Kailash Kher:


Kailash Kher ने एक बार कहा था कि, “जिंदगी आपको सब कुछ दे सकता है जिसकी आप Imagination करते हैं, पर उसकी वह भरपूर कीमत वसूलता है. यदि आप वह कीमत चुकाने को तैयार हैं, तो Success भी आपके कदम चूमने के लिए तैयार है.”

Abraham Lincoln: 


America के पूर्व President Abraham Lincoln ने कहा था, “अगर लगने लगे कि आपका लक्ष्य आपको हासिल नहीं हो पायेगा तो लक्ष्य को न बदलें, बल्कि अपने प्रयासों को बदलें.” Abraham Lincoln के इस ब्रह्मवाक्य का अर्थ है कि, “हमें मंजिल दे सकता है, जरुरत है अपने मन के मजबूत विश्वास की.” 

आप भी जुनून और लगन से किसी भी मुकाम को हासिल कर सकते है, लेकिन उसके लिए मेहनत शर्त है.

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Sunday, 31 January 2016

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10 Things Can Change Your Life : 10 बातें जो बदल दे आपकी जिंदगी...!!!

10 Things Can Change Your Life

 1. Importance of Education in Life:

आज व्यक्ति ज्ञान पाने को इच्छुक नज़र आता है. वह ज्ञान को Books में खोजता है, उपाधियों में पता है. Education के पश्चात् वह Doctor, Engineer अथवा Administrative Post पाने की लालसा भी रखता है. लेकिन क्या यही ज्ञान प्राप्ति के उद्देश्य हैं? यदि ज्ञान आपको मनुष्यता की राह पर नहीं लाता तो वह आपको स्वार्थी (Selfish) बना रहा है. वह आपको Self-Oriented Life जीने को प्रेरित कर रहा है. अतः Educated Person बनने के पश्चात् यह ज़रूरी है कि आप सही अर्थों में मनुष्य बनें और मानवता की सेवा का जज़्बा आप में उदित हो.

2. Importance of Time in Life:

Social Behavior का ज्ञान रखने वाला व्यक्ति जब आपके Personality को परखते हैं तो वह यह जानने का प्रयत्न करते हैं कि आप Time को कितना Importance देते हैं अथवा समय की उपयोगिता आपके लिए क्या है? अतः लोगों के साथ समय के पाबंद रहें और कर्म के प्रति निष्ठावान रहें. समय का सदुपयोग करें और निष्क्रिय रहते हुए समय नष्ट न करें. उचित समय पर कार्य आरम्भ करें और कतई भी Careless होकर न करें कि आपको पुनः उस कार्य पर समय व्यतीत करना पड़े.

3. Importance of Challenge in Life:

जिंदगी कि सीधी राहों पर चलना कतई भी मुस्किल नहीं है. लेकिन टेढ़ी-मेढ़ी राहों पर ही आपके Skills और Personality की Real Examination होती है. Social Behavior Person एवम् Experience Person आपको तब ज्यादा परखते है जब आप Challenge को Accept करने की दिशा में अग्रसर होते हैं. अतः यह आपके लिए आवश्यक है कि जब Life में Challenge अथवा अवसर प्राप्त हो, आप उसे दोनों हाथों से थाम लें. स्वयं को जानने का एकमात्र मार्ग यही है कि आप Difficult Situation में से अपने Skill को गुजरने की इजाजत दें.

4. Importance of Judgment in Life:

हमारे Life में ऐसे कई अवसर आते हैं, जब हमें किसी व्यक्ति विशेष के बारे में कोई Judgment करने की आवश्यकता होती है. यह भी हो सकता है कि दो व्यक्तियों के मध्य का वाद-विवाद (Debate) आपको सौंप दिया जाता है. ऐसे में आपका यह Responsibility बनता है कि मध्यस्तर की भूमिका में आप तटस्थ रहें और पूर्वाग्रह के आधार पर कोई भी Judgment न करें. सदैव याद रखें कि लोक व्यहवारी की निर्णय शक्ति में प्रभाव अवश्य ही होना चाहिए. किसी भी बात का फैसला करने से पूर्व सिक्के के दोनों पहलुओं पर विचार करना आवश्यक होता है. निर्णय करते समय इंसानियत का प्रकाश कम न होने दें, यही उत्तम Social Behavior माना जाता है.

5. Importance of Love in Life:

Love... दुनिया का सबसे पावन शब्द है जो वस्तुत “माँ” शब्द के पश्चात् सबसे पवित्र माना जाता है. आपकी ज़िन्दगी में प्रेम के क्या मायने हैं, यह आपका Character साबित करता है, आपके विचार नहीं. यदि आपको किसी से प्रेम है तो आप पाएंगे कि उसके प्रति आप Normal हैं और उसके Mistakes को भी क्षमा कर देते है. उसकी तकलीफ और उसकी आवश्यकता आपको विचलित कर देती है और आपकी Utmost कोशिश रहती है कि उसे तकलीफ न हो और उसकी आवश्यकता की पूर्ति हो जाए. लेकिन प्रेम का भाव Self-Refreshing होता है. सात फेरों या सात वचनों से आप रिश्ता तो पातें हैं लेकिन वह कर्तव्य (Duty) का होता है, जबकि प्रेम किसी बंधन का नाम नहीं है. प्रेम के लिए कोई रिश्ता हो, यह भी आवश्यक नहीं, क्योंकि प्रेम आप एक पालतू जानवर (Dog, Cat, Horse Etc.) से भी कर सकते हैं.

6. Importance of Courage in Life:

Social Behavior को संतुलित बनाए रखने के लिए जब आप अपने Personality को अनुकूल बनाने का प्रयास करते हैं तो आपको यह याद रखना होगा कि व्यक्तित्व की सभी दिशाओं को चमकाया जाए. यदि आप अपने व्यक्तित्व एक भी दिशा को रिक्त छोड़ देते हैं तो वह दिशा आपके Personality की अन्य दिशाओं को भी दूषित कर देगा. बेशक यह Difficult Work है, लेकिन यह याद रखें कि महानता भी Difficult Situation को Solve करने से ही प्राप्त होती है. फिर मानव यदि हिम्मत करे तो वह क्या नहीं प्राप्त कर सकता?

7. Reduce Laziness in Life:

यदि आप आलस्य की गोद में पड़े हैं तो महानता के Horizon की बात जाने ही दें, आप छत पर लगे मकड़े के जाले को भी स्पर्श नहीं कर सकते. आलस्य ऐसा संक्रामक रोग (Infectious Disease) है, जो आपके अन्य Good Qualities को भी खत्म कर देता है. आलस्य आपका सबसे बड़ा शत्रु है. यदि आपने आलस्य से दोस्ती कर ली है तो समझ लें कि आपने पूरी दुनिया से दुश्मनी कर ली. Lazy Person का प्रत्येक गुण एवम् एश्वर्य शीघ्र ही Destroy हो जाता है. आलस्य का कोई भी व्यक्तिगत गुण (Personal Attributes) नहीं है. अतः आलस्य का त्याग करें.

8. Importance of Honesty And Altruism in Life:

आपका दिल कैसा है? Social Behavior आपके दिल में बसी Honesty एवम् सहायता के भाव से प्रभावित होते हैं. उन्हें इस बात से कोई भी फर्क नहीं पड़ता है कि आप धन कुबेर (Rich) हैं या किसी देश के Highest Post पर हैं. यदि ईमानदारी और परोपकारिता (Altruism) आपके दिल में धड़क रही है तो आप दुनिया के सबसे गरीब व्यक्ति होने के पश्चात् भी लोक व्यहवार की दृष्टि से आप Great Person हैं.

9. Importance of Good Character in Life:

आपका Character... अर्थात् जिन आदेशों को लेकर आप जीवित हैं, उन आदेशों के प्रति आपका अटूट समपर्ण ही आपका Character कहलाता है. अतः अपने Character के प्रति Strong रहें और प्रलोभनों के माध्यम से होकर गुजर जाएँ. Social Behavior की कला का प्रथम एवम् अंतिम उद्देश्य भी यही है कि व्यक्ति Advanced एवम् Strong Character का स्वामी बने.

10. Importance of Self-Confidence in Life:

धारा के साथ तो सभी तैर सकते हैं, पर अच्छा तैराक वही होता है जो धारा के विरुद्ध भी तैर सके. साधारण स्थितियों में व्यक्ति अपना Self-Confidence बना कर रखता है, यह अच्छी बात है. लेकिन विपरीत Situations में भी आत्मा को अनुशासित रख पाये, यही Challenging होता है. अक्सर होता यही है कि हमें जहाँ Challenge से गुजरना होता हैं, वहाँ हम पीछे हट जाते हैं. हमें चाहिए कि हम Challenge का सामना पूरे Self-Confidence के साथ करें.

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